उत्तराखंड में सात साल में सबसे सूखा दिसंबर, नए साल में वर्षा के आसार

lokjanexpress.com
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उत्तराखंड में इस बार शीतकाल में वर्षा-बर्फबारी की कमी रही है। पिछले सात साल में दिसंबर सबसे सूखा रहा, जिसमें बिल्कुल बारिश नहीं हुई। इससे तापमान सामान्य से अधिक रहा। हालांकि, माह के अंत में सर्दी बढ़ी। मौसम विभाग ने नए साल में पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षा-बर्फबारी और मैदानी इलाकों में कोहरे का येलो अलर्ट जारी किया है, जिससे राहत की उम्मीद है।

देहरादून। उत्तराखंड में इंद्रदेव की बेरुखी से इस बार शीतकाल में वर्षा-बर्फबारी का इंतजार बढ़ता जा रहा है। नवंबर में बेहद कम वर्षा के बाद दिसंबर में प्रदेश में बारिश बिल्कुल नहीं हुई। इससे तापमान पर भी असर देखा गया। ज्यादातर क्षेत्रों में पारा सामान्य से दो से चार डिग्री सेल्सियस अधिक बना रहा। हालांकि, माह के अंतिम सप्ताह में पारे में गिरावट आई और ज्यादातर क्षेत्रों में सर्दी का सितम बढ़ गया। पिछले सात साल में यह सबसे सूखा दिसंबर रहा है। हालांकि, नए वर्ष की शुरुआत में वर्षा की उम्मीद जगी है।

दिसंबर की शुरुआत से ही प्रदेश में मौसम की बेरुखी रही और पूरे माह वर्षा लगभग न के बराकर हुई। खासकर मैदानी क्षेत्रों में शुष्क मौसम के चलते पारा सामान्य से अधिक बना रहा। प्रदेशभर में मानसून सीजन के अंत से ही वर्षा बेहद कम दर्ज की जा रही है। अक्टूबर में शीतकाल की शुरुआत के बाद से लगातार वर्षा में कमी दर्ज की जा रही है। अब तक शीतकाल में सामान्य से 24 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। हालांकि, बीते दो माह तो लगभग सूखे बीते।

देहरादून में शीत दिवस, धूप न खिलने से आठ डिग्री लुढ़का पारादेहरादून में दिसंबर में आमतौर पर दो से चार मिमी वर्षा होती है। हालांकि, पिछले छह वर्ष में यह पहली बार हुआ है कि यहां करीब पूरे माह वर्षा नहीं हुई। हालांकि, बीते दो दिनों से पर्वतीय क्षेत्रों में बादल मंडरा रहे हैं और मैदानी क्षेत्रों में कोहरे और धुंध का प्रकोप है। इस बीच बुधवार को दून में सूर्य के दर्शन नहीं हुए। पूरे दिन बादलों के साथ ही धुंध छायी रही। जिससे पारे में 24 घंटे के भीतर छह डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई और शीत दिवस की स्थिति रही।अन्य मैदानी क्षेत्रों में कोहरे के कारण कड़ाके की ठंड महसूस की जा रही हैें। उत्तर भारत में भीषण कोहरे के प्रकोप से देहरादून आने वाली दो हवाई सेवाएं रद कर दी गईं और दो उड़ानें देरी से पहुंचीं। ट्रेनों का समय भी प्रभावित चल रहा है।

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