श्री देव सुमन विश्वविद्यालय के अव्यवहारिक फरमान से संबद्ध कॉलेज संकट में l डॉ सुनील अग्रवाल।

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श्री देव सुमन विश्वविद्यालय से संबद्ध निजी कॉलेज विश्वविद्यालय के ताजा फरमान से गंभीर संकट में फंस गए हैं विस्तृत जानकारी देते हुए निजी कॉलेज एसोसिएशन उत्तराखंड के अध्यक्ष डॉ सुनील अग्रवाल ने बताया की श्री देव सुमन विश्वविद्यालय से संबद्ध निजी कॉलेजों को पहले संबद्धता शुल्क₹5000 प्रतिवर्ष निर्धारित था सत्र 2019 से विश्वविद्यालय ने संबद्धता शुल्क ₹5000 प्रति वर्ष से बढ़ाकर 55000 प्रतिवर्ष कर दिया था और 2019 से कॉलेजों से 55000 प्रति वर्ष संबद्धता शुल्क लिया जा रहा था अब अचानक ही विश्वविद्यालय द्वारा कॉलेजों को प्रतिवर्ष प्रति विषय के हिसाब से 55000 संबद्धता विस्तारण शुल्क की डिमांड भेजी गई है जिन कॉलेजों ने 55000 प्रतिवर्ष के हिसाब से संबद्धता शुल्क जमा किया हुआ था अब उनको 2019 से प्रतिवर्ष प्रति विषय अतिरिक्त धनराशि की डिमांड के पत्र भेजे गए हैं जो कुछ कॉलेजों के 35 लाख रुपए तक भी हैं इसमें विश्वविद्यालय द्वारा महालेखाकार का हवाला दिया गया है प्रश्न यह उठता है कि जब विश्वविद्यालय द्वारा 55000 प्रति वर्ष संबद्धता शुल्क लिया जा रहा था तो अब उन पूर्व के वर्षों जिनके छात्रों की परीक्षाएं हो चुकी है छात्रों के परीक्षा परिणाम घोषित हो चुके हैं अगर संबद्धता शुल्क विश्वविद्यालय के नियमानुसार नहीं था तो विश्वविद्यालय द्वारा कॉलेज के छात्रों की परीक्षाएं कैसे करवाई गई और उनके परिणाम कैसे घोषित किए गए अब जबकि उन सत्र के छात्रों की परीक्षाएं हो चुकी है और परीक्षा परिणाम घोषित हो चुके हैं अब विश्वविद्यालय द्वारा पूर्व के वर्षों हेतु अचानक अतिरिक्त संबद्धता शुल्क के पत्रों से कॉलेज संचालक सकते में है और विश्वविद्यालय के इस अव्यवहारिक फरमान का विरोध कर रहे हैं यहां यह भी उल्लेखनीय है की विश्वविद्यालय द्वारा उक्त 55000 प्रतिवर्ष प्रति विषय संबद्धता शुल्क के बावजूद विश्वविद्यालय की निरीक्षण टीम को टीए डीए संबद्ध कॉलेज को अदा करना पड़ता है जिसके लिए विश्वविद्यालय के पत्र में उल्लेख किया जाता है जबकि पूर्व में राज भवन के पत्र में स्पष्ट उल्लेख था की निरीक्षण टीम को कॉलेज द्वारा कोई भुगतान नहीं किया जाएगा इस सबके बावजूद अभी तक कई कॉलेजों के संबद्धता प्रमाण पत्र 5 वर्षों से लटके हुए हैं यह भी उल्लेखनीय है की जो कोर्स 3 वर्ष के होते हैं उनके लिए प्रतिवर्ष संबद्धता शुल्क का क्या औचित्य है ऐसे में गंभीर प्रश्न यह भी है की नई शिक्षा नीति के अंतर्गत सभी कॉलेजों को नैक से एक्रीडिटेशन लेना है लेकिन जब तक कॉलेज के पास संबद्धता विस्तारण के प्रमाण पत्र नहीं होंगे तो नैक से एक्रीडिटेशन लेना संभव नहीं है इसी तरह से नई शिक्षा नीति के अंतर्गत अगर किसी कॉलेज को ऑटोनॉमी लेनी है जिसके बारे में राज्य सरकार घोषणा भी कर चुकी है तो बिना संबद्धता प्रमाण पत्रके कॉलेज ऑटोनॉमी के लिए भी आवेदन नहीं कर सकता इन परिस्थितियों को देखते हुए जाहिर होता है की जो विश्वविद्यालय कॉलेजों को एफीलिएशन देने के लिए बनाया गया था अब सरकार द्वारा प्रदेश में निजी विश्वविद्यालय की बहुतायत में स्वीकृति के बाद कॉलेज का एफीलिएशन समाप्त करने की रणनीति पर कार्य किया जा रहा है अब वर्तमान परिस्थितियों में कॉलेज के सामने संचालन का गंभीर संकट खड़ा हो चुका है और अधिकांश कॉलेजों ने इन परिस्थितियों में अपने कोर्स सरेंडर करने का मन बना लिया है ऐसे में कॉलेजों में छात्रों के एक वर्ष के कोर्स के बाद अगर कॉलेज कोर्स सरेंडर करते हैं तो ऐसे में छात्रों को होने वाली परेशानी के लिए पूरी तरह से विश्वविद्यालय जिम्मेदार होगा जल्दी ही इस विषय पर सभी कॉलेजों की बैठक बुलाकर इस तुगलकी फरमान के खिलाफ आगामी रणनीति की घोषणा की जाएगी। डॉ सुनील अग्रवाल

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