संस्कृत विभाग द्वारा आयोजित व्याख्यान श्रृंखला में आनलाइन माध्यम से द्वितीय व्याख्यान का आयोजन
आज दिनांक 21 जनवरी 2026 को हे. न. ब. गढ़वाल केन्द्रीय विश्वविद्यालय, बी. जी. आर. परिसर, पौड़ी के संस्कृत विभाग द्वारा आयोजित व्याख्यान श्रृंखला में द्वितीय व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ लौकिक मंगलाचरण के साथ हुआ। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के तौर पर डॉ. रमेशचंद्र नैनवाल( सहायकाचार्य, बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्विद्यालय, लखनऊ) द्वारा गुरुकुल परंपरा के अनुरूप शिक्षा का दर्शन” विषय पर व्याख्यान देते हुए बताया गया कि कैसे हमारा देश आजादी के बाद से ही शिक्षा के क्षेत्र में अलग– अलग प्रयोगों से गुजर रहा है। ऐसे में वर्तमान समय में जब हमारा राष्ट्र भारतीय समस्याओं का भारतीय समाधान खोज रहा है तो फिर हम भारतीय ज्ञान की अलग अलग विधाओं की तरफ लौट रहे हैं, इसी के अंतर्गत मुख्य वक्ता द्वारा प्राचीन गुरुकुल प्रणाली के महत्व और उनकी वर्तमान प्रासंगिकता को सभी के मध्य रखा गया। व्याख्यान में चर्चा की गई कि गुरुकुल की मूल रूप से अवधारणा हमारे शास्त्रों में और ग्रंथों में किस प्रकार बताई गई है, जिसमें ज्ञान के चार चरण, अष्टांगिक मार्ग, गुरुकुलीय परम्परा में गुरु के महत्व और उनके स्वभाव के साथ– साथ पूरी की पूरी गुरुकुलीय अधिगम प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई।कार्यक्रम में इस विषय पर चर्चा की गई कि गुरुकुलीय प्रणालियों से कैस विद्यार्थियों में अनुशासन, नैतिक मूल्यों का समावेशन और समाज के प्रति सम्मान की भावना का संचार किया जाता था। कार्यक्रम की अध्यक्षता परिसर निदेशक प्रो. यू. सी. गैरोला ने की, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय श्रीरघुनाथ कीर्ति परिसर के निदेशक प्रोफेसर पी. वी. बी. सुब्रह्मण्यम महोदय ने अपने उद्बोधन से सभी को उद्बोधित किया। इसके अतिरिक्त कार्यक्रम समन्वयिका प्रो. कुसुम डोबरियाल, पूर्व परिसर निदेशक प्रो. अनूप डोबरियाल, प्रो.रेखा नैथानी, डॉ. पूनम बिष्ट रावत, डॉ . एन. के. आर्य, डॉ. विश्वेश वाग्मी, डॉ . नीलम नेगी,डॉ . धर्मेन्द्र कुमार, डॉ. अमन कुमार शर्मा, डॉ. सपना रावत, डॉ. विपुल सिंह, डॉ. बिन्दु यादव, डॉ. मनोज कुमार, डॉ . देवेन्द्र सिंह, डॉ. दीवान सिंह राणा, डॉ. कृपाल सिंह तोमर, डॉ. ललिता, डॉ. पंकज कोटियाल, डॉ.सी भी कोटनाला, डॉ. प्रीति, डॉ. बालकृष्ण बधानी, डॉ. राजपाल शास्त्री, सहित विभिन्न विभागों के शिक्षकगण, शोधार्थी तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। उपस्थित श्रोताओं ने विषय को समसामयिक और अत्यंत प्रासंगिक बताते हुए व्याख्यान की सराहना की। कार्यक्रम का संचालन डॉ गोकुल चन्द्र फुलारा जी ने किया, कार्यक्रम का तकनीकी संयोजन डॉ. बिपिन कुमार जी ने किया एवं कार्यक्रम में उपस्थित सभी का स्वागत, धन्यवाद ज्ञापन एवं कार्यक्रम का सफल संयोजन संस्कृत विभाग के सहायकाचार्य डॉ. दिनेश चन्द्र पाण्डेय जी ने किया।


