बर्फबारी के बीच त्रियुगीनारायण मंदिर में 7 जोड़ों ने की शादी, शिव-पार्वती के विवाह स्थल के रूप में फेमस है यह स्थल

News Desk
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वसंत पंचमी पर रुद्रप्रयाग के त्रियुगीनारायण मंदिर में बर्फबारी के बीच सात जोड़ों ने सात फेरे लिए। इनमें पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और उत्तराखंड के जोड़े शामिल थे। भगवान शिव-पार्वती के विवाह स्थल पर शादी को सभी ने सौभाग्य माना। कड़ाके की ठंड और बर्फबारी के बावजूद वर-वधुओं, परिजनों और पर्यटकों में जबरदस्त उत्साह दिखा, जिससे मंदिर परिसर में चहल-पहल बनी रही।

भगवान शिव एवं माता पार्वती के पावन विवाह स्थल त्रियुगीनारायण मंदिर में वसंत पंचमी के शुभ अवसर पर एक साथ सात विवाह संस्कार संपन्न हुए। बर्फबारी के बीच वर-वधुओं ने सात फेरे लिए।

शादी के अवसर पर मंदिर परिसर में बर्फ गिरती रही। इसके बावजूद वर-वधु, स्वजन एवं पर्यटकों में जबरदस्त उत्साह रहा। ठंड की परवाह किए बिना विवाह की रस्में पूरी की गईं और मंदिर परिसर में चहल-पहल बनी रही।त्रियुगीनारायण मंदिर समिति के सचिव सर्वेश्वर भट्ट ने बताया कि वसंत पंचमी के अवसर पर मंदिर में कुल सात शादियां निर्धारित थीं। उन्होंने कहा कि कड़ी ठंड के बावजूद नवविवाहित जोड़ों ने बर्फ के बीच ही फेरे लिए।बर्फ से ढके त्रियुगीनारायण मंदिर में संपन्न हुए ये विवाह न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बने, बल्कि प्रकृति के सान्निध्य में विवाह की एक अनुपम मिसाल भी प्रस्तुत की गई।शादी के अवसर पर मंदिर परिसर में बर्फ गिरती रही। इसके बावजूद वर-वधु, स्वजन एवं पर्यटकों में जबरदस्त उत्साह रहा। ठंड की परवाह किए बिना विवाह की रस्में पूरी की गईं और मंदिर परिसर में चहल-पहल बनी रही।

त्रियुगीनारायण मंदिर समिति के सचिव सर्वेश्वर भट्ट ने बताया कि वसंत पंचमी के अवसर पर मंदिर में कुल सात शादियां निर्धारित थीं। उन्होंने कहा कि कड़ी ठंड के बावजूद नवविवाहित जोड़ों ने बर्फ के बीच ही फेरे लिए।

बर्फ से ढके त्रियुगीनारायण मंदिर में संपन्न हुए ये विवाह न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बने, बल्कि प्रकृति के सान्निध्य में विवाह की एक अनुपम मिसाल भी प्रस्तुत की गई।

शादी के अवसर पर मंदिर परिसर में बर्फ गिरती रही। इसके बावजूद वर-वधु, स्वजन एवं पर्यटकों में जबरदस्त उत्साह रहा। ठंड की परवाह किए बिना विवाह की रस्में पूरी की गईं और मंदिर परिसर में चहल-पहल बनी रही।

त्रियुगीनारायण मंदिर समिति के सचिव सर्वेश्वर भट्ट ने बताया कि वसंत पंचमी के अवसर पर मंदिर में कुल सात शादियां निर्धारित थीं। उन्होंने कहा कि कड़ी ठंड के बावजूद नवविवाहित जोड़ों ने बर्फ के बीच ही फेरे लिए।

बर्फ से ढके त्रियुगीनारायण मंदिर में संपन्न हुए ये विवाह न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बने, बल्कि प्रकृति के सान्निध्य में विवाह की एक अनुपम मिसाल भी प्रस्तुत की गई।

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