देहरादून, ऋषिकेश और विकासनगर में रजिस्ट्री से जुड़े बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें स्टांप चोरी और प्रतिबंधित जमीनों की रजिस्ट्री जैसी अनियमितताएं सामने आई हैं।
देहरादून। जिले में रजिस्ट्री व्यवस्था से जुड़े खुलासे अब अलग-अलग घटनाएं नहीं रहे, बल्कि बड़े और संगठित खेल की तस्वीर सामने आने लगी है। पहले देहरादून रजिस्ट्रार कार्यालय, फिर ऋषिकेश और अब विकासनगर।
तीनों जगहों पर सामने आई अनियमितताओं ने साफ कर दिया है कि जमीन के लेन-देन में नियमों को दरकिनार कर लंबे समय से ‘कागजी खेल’ चल रहा था। अब जिलाधिकारी सविन बंसल के आदेश पर संदिग्ध रजिस्ट्रियों की दोबारा जांच (री-स्क्रूटनी), राजस्व नुकसान की वसूली और दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई की तैयारी जिला प्रशासन ने शुरू कर दी है।
लंबे समय से ‘कागजी खेल’
राजधानी देहरादून में शुरुआती जांच के दौरान अभिलेखों में गड़बड़ी, संपत्तियों का कम मूल्यांकन दिखाकर स्टांप शुल्क में हेरफेर और राजस्व को नुकसान पहुंचाने के मामले सामने आए थे। इसके बाद ऋषिकेश में भी ऐसे प्रकरण उजागर हुए, जहां प्रतिबंधित या नियमों के दायरे से बाहर की जमीनों की रजिस्ट्री कर दी गई। इससे यह संकेत मिला कि जांच और सत्यापन की प्रक्रिया या तो कमजोर है या जानबूझकर नजरअंदाज की जा रही है।
विकासनगर में जिलाधिकारी सविन बंसल की छापेमारी ने इन आशंका को और मजबूत कर दिया है। यहां वर्षों पुराने मूल विलेख पत्र संदिग्ध स्थिति में दबाकर रखे मिले, प्रतिबंधित भूमि की रजिस्ट्री के मामले भी सामने आए और धारा 47-ए के तहत स्टांप शुल्क चोरी के कई प्रकरण चिह्नित हुए।
पूर्व अधिकारी भी संदेह के घेरे में
एक ही तरह की गड़बड़ियां अलग-अलग कार्यालयों में मिलना इस बात की ओर इशारा करता है कि मामला केवल लापरवाही तक सीमित नहीं है। पूरे घटनाक्रम को जोड़कर देखें तो एक पैटर्न साफ उभरता है, जमीन की वास्तविक कीमत कम दिखाकर राजस्व की चोरी और नियमों के विपरीत रजिस्ट्री। बाद में रिकार्ड को इस तरह संभालना कि जांच में देरी या भ्रम पैदा हो। यही कारण है कि अब प्रशासन ने न सिर्फ मौजूदा बल्कि पूर्व में तैनात अधिकारियों के कार्यकाल की भी जांच के निर्देश दिए हैं।
आखिर कितना बड़ा है माफिया का नेटवर्क
लगातार हो रही कार्रवाई ने रजिस्ट्री तंत्र में हड़कंप जरूर मचाया है, लेकिन साथ ही यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि आखिर यह नेटवर्क कितना बड़ा है और कितने समय से सक्रिय था। यदि जांच गहराई तक पहुंचती है, तो आने वाले दिनों में और बड़े राजफाश होने की पूरी संभावना है।
रजिस्ट्री खेल की अंदरूनी कहानी
देहरादून, ऋषिकेश व विकासनगर में सामने आए मामलों को जोड़कर देखें तो रजिस्ट्री सिस्टम में गड़बड़ियों में दलालों, वकीलों व कुछ जिम्मेदार कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका भी लगातार सामने आ रही है, जिससे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब मामले में जिलाधिकारी की ओर से शासन स्तर पर समग्र रिपोर्ट भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।


