सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: आवारा कुत्तों पर नसबंदी अनिवार्य, आक्रामक कुत्ते रहेंगे शेल्टर होम में

News Desk
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देश में लगातार बढ़ती स्ट्रे डॉग्स (आवारा कुत्तों) की समस्या और लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने आज (शुक्रवार) एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि अब सभी आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण किया जाएगा और उसके बाद उन्हें उसी इलाके में छोड़ना होगा। लेकिन जो कुत्ते बीमार हैं या फिर आक्रामक व्यवहार करते हैं, उन्हें शेल्टर होम में ही रखा जाएगा।

कोर्ट का आदेश तीन जजों की स्पेशल बेंच — जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया — ने सुनवाई करते हुए साफ किया कि:कुत्तों को सार्वजनिक जगहों पर खाना खिलाने पर रोक जारी रहेगी।उनके लिए नियत स्थान तय किया जाएगा, और वहीं भोजन देना होगा।अगर किसी ने नियम तोड़ा तो कार्रवाई की जाएगी।सभी कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण करके उन्हें तुरंत छोड़ा जाए।आक्रामक और रेबीज से संक्रमित कुत्ते शेल्टर होम में ही रहेंगे।क्यों लिया गया यह फैसला?दरअसल, 11 अगस्त 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर से आवारा कुत्तों को हटाकर स्थायी शेल्टर होम में रखने का आदेश दिया था। इस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसके बाद अब कोर्ट ने संशोधन करते हुए कहा है कि सभी कुत्तों को उनके इलाके में वापस छोड़ा जाएगा।सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि:साल 2024 में ही 31 लाख से ज्यादा डॉग बाइट केस दर्ज हुए।इसका मतलब है कि हर दिन करीब 10,000 लोग कुत्तों के काटने का शिकार हो रहे हैं।WHO की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में 300 से ज्यादा मौतें कुत्तों के काटने से हुई थीं।स्थानीय निकायों की लापरवाही कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर के स्थानीय निकायों (एमसीडी, एनडीएमसी, नोएडा अथॉरिटी, गाजियाबाद, गुरुग्राम) को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि नसबंदी और टीकाकरण के नियम सही तरीके से लागू नहीं किए जा रहे। अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए तुरंत कार्रवाई जरूरी है।पशु प्रेमियों की नाराज़गी इस फैसले के बाद डॉग लवर्स और एनिमल एक्टिविस्ट्स ने नाराज़गी जताई है। उनका कहना है कि यह आदेश बेजुबान जानवरों के साथ अन्याय है। सोशल मीडिया पर भी कई लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आलोचना की और कुत्तों की सुरक्षा की मांग उठाई।आगे क्या होगा?सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 8 सप्ताह बाद तय की है। तब तक सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को नोटिस भेजकर कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी गई है।

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