हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल (केन्द्रीय विश्वविद्यालय) के बी. जी. आर. परिसर, पौड़ी स्थित संस्कृत विभाग द्वारा तृतीय व्याख्यान का सफल आयोजन

News Desk
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आज दिनांक 23 फरवरी 2026 को हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल केन्द्रीय विश्वविद्यालय के बी. जी. आर. परिसर, पौड़ी स्थित संस्कृत विभाग द्वारा आयोजित व्याख्यान श्रृंखला के अंतर्गत तृतीय व्याख्यान का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर के आचार्य डॉ. अङ्कुर वत्स जी एवं छात्रों द्वारा वैदिक मंगलाचरण के साथ हुआ।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में पद्मश्री से सम्मानित प्रख्यात विद्वान प्रो. पुष्पेश पंत ने “वैश्वीकरण की नैतिकता” विषय पर सारगर्भित एवं विचारोत्तेजक व्याख्यान प्रस्तुत किया। अपने उद्बोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्वीकरण का मूल विचार प्राचीन काल से ही समावेशिता, सहमति एवं सहअस्तित्व की भावना पर आधारित रहा है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में उदारवादी एवं पूंजीवादी शक्तियों द्वारा वैश्वीकरण के एक विशिष्ट मॉडल को विश्व पर आरोपित किया गया, जिसके नैतिक आयामों पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। प्रो. पंत ने भारतीय परंपरा में निहित नैतिक चिंतन की बहुलता और उसकी सार्वभौमिक दृष्टि का विश्लेषण करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञानपरंपरा में वैश्विक दृष्टि सदैव नैतिक मूल्यों से अनुप्राणित रही है। कार्यक्रम का संचालन संस्कृत विभाग के प्रभारी विभागाध्यक्ष डॉ दिनेश चन्द्र पाण्डेय ने किया।


कार्यक्रम की अध्यक्षता परिसर निदेशक प्रो. यू. सी. गैरोला ने की। कार्यक्रम में समन्वयिका प्रो. कुसुम डोबरियाल सहित विभिन्न विभागों के शिक्षकगण, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। उपस्थित श्रोताओं ने विषय को अत्यन्त समसामयिक एवं प्रासंगिक बताते हुए व्याख्यान की सराहना की।कार्यक्रम के अन्त में इतिहास विभाग की डॉ. नीलम नेगी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।

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