हरिद्वार ट्रेजरी में फर्जी बिलों से सरकारी धन निकालने के 23 साल पुराने मामले में विशेष सीबीआई अदालत ने आठ आरोपियों को दोषी ठहराया है।
देहरादून। हरिद्वार ट्रेजरी से फर्जी बिलों के जरिये सरकारी धन निकालने के चर्चित मामले में विशेष सीबीआइ अदालत ने 23 साल बाद सात आरोपितों को दोषी ठहराते हुए एक साल, जबकि एक दोषी को दो वर्ष कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
विशेष न्यायाधीश मदन राम की अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि सरकारी धन के दुरुपयोग में दस्तावेजी साक्ष्य और गवाहियों से आरोप सिद्ध हुए।शासकीय अधिवक्ता अभिषेक अरोड़ा ने बताया कि सीबीआइ जांच के अनुसार वर्ष 2001-02 में हरिद्वार और रुड़की लोक निर्माण विभाग के कर्मचारियों, ट्रेजरी अधिकारियों और उनके करीबी व्यक्तियों ने वेतन एरियर, जीपीएफ अग्रिम, मेडिकल क्लेम और स्टेशनरी खरीद के नाम पर फर्जी बिल तैयार किए।
इन बिलों को ट्रेजरी में प्रस्तुत कर सरकारी चेक जारी कराए गए और 55 लाख 10 हजार 511 रुपये की निकासी कर ली गई।इस मामले मामले में दीपक कुमार वर्मा एलडीसी लोनिवि हरिद्वार, सुखपाल सिंह यूडीसी लोनिवि रुड़की, मदन पाल मेट लोनिवि हरिद्वार, मनीराम बेलदार लोनिवि हरिद्वार, सुरेंद्र कुमार चालक लोनिवि हरिद्वार, छतर सिंह रोलर चालक लोनिवि रुड़की, कासिम और पालू दास को विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया गया।
अधिकांश दोषियों को आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के उपयोग में एक-एक वर्ष का कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई।वहीं, सहायक ट्रेजरी अधिकारी पालू दास को दो वर्ष का कारावास व 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।


