कॉलेज ऑफ फार्मेसी, शिवालिक कैंपस 3, 4 अप्रैल 2026 को “बौद्धिक संपदा अधिकार विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन

News Desk
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कॉलेज ऑफ फार्मेसी, शिवालिक कैंपस, देहरादून द्वारा 3–4 अप्रैल 2026 को “बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) – जागरूकता, नवाचार एवं पेटेंट संरक्षण” विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यशाला उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST) के सहयोग से आयोजित की गई। इस कार्यशाला में 120 से अधिक छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों एवं संकाय सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यशाला में प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने अपने विचार प्रस्तुत किए, जिनमें श्री हिमांशु गोयल (वैज्ञानिक-बी, पेटेंट सूचना केंद्र, UCOST), डॉ. दीपक कुमार सेमवाल (उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय), डॉ. आशीष माथुर (UPES), डॉ. राजेश सिंह (उत्तरांचल विश्वविद्यालय) तथा डॉ. उमेश सी. बनाकर (सलाहकार, फार्मास्यूटिकल उद्योग एवं शिक्षाविद, USA) शामिल थे। विशेषज्ञों ने बौद्धिक संपदा के महत्व, नवाचार को बढ़ावा देने तथा आर्थिक विकास में इसकी भूमिका पर विस्तृत जानकारी प्रदान की।
वक्ताओं ने बताया कि IPR आविष्कारकों को उनके शोध कार्य के लिए मान्यता एवं पुरस्कार प्रदान करता है, नवाचारों को कानूनी संरक्षण देता है तथा नए उद्योगों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देकर आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है। उन्होंने यह भी बताया कि एक मजबूत IPR प्रणाली रचनात्मकता को प्रोत्साहित करती है, जिससे समाज के सभी वर्गों को लाभ होता है। साथ ही, IPR संरक्षण बाजार आधारित अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रदान करता है।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा पेटेंट की योग्यता (patentability criteria) एवं पेटेंट प्रक्रिया के व्यावहारिक पहलुओं की समझ विकसित करना था। कार्यशाला के दौरान बौद्धिक संपदा (IP), बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR), IP संरक्षण का महत्व, पेटेंट, ट्रेडमार्क, औद्योगिक डिजाइन, भौगोलिक संकेतक (GI) तथा कॉपीराइट जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।
कार्यशाला के प्रथम दिवस का समापन कॉलेज ऑफ फार्मेसी के विभागाध्यक्ष डॉ. अमित सेमवाल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया।

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