पुरोला के सेवा गांव में सड़क न होने के कारण एक बीमार महिला को 11 किमी तक कंधों पर उठाकर अस्पताल ले जाना पड़ा। ग्रामीणों ने नेताओं पर चुनाव के बाद गांव की उपेक्षा का आरोप लगाया।
पुरोला (उत्तरकाशी)। सीमांत मोरी विकासखंड के सुदूरवर्ती व हिमाचल प्रदेश की सीमा से सटे सेवा गांव में सड़क के अभाव में ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं से दूर हैं। इस कारण उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।सोमवार को क्षेत्र में एक महिला की तबीयत अचानक खराब हो गई, जिसे सड़क के अभाव में कंधों पर उठाकर स्वजन व ग्रामीणों को 11 किमी कठिन पैदल दूरी नापकर पहले धौला और फिर अस्पताल पहुंचाना पड़ा।सामाजिक कार्यकर्ता राजपाल रावत ने बताया कि सेवा गांव की खकरा देवी अपेंडिक्स की समस्या से ग्रसित है। बीते कुछ समय पहले उसका देहरादून के एक अस्पताल में आपरेशन हुआ।आपरेशन के बाद वह गांव आ गई थी, लेकिन यहां दोबारा अचानक उसकी तबीयत खराब हुई, उसे अचानक पेट दर्द, उल्टी, बुखार व दोनों पैरों में तकलीफ हुई।इस पर स्वजन व ग्रामीण बीमार खकरा देवी को लकड़ियों की बल्लियों पर कुर्सी बांध उसमें बैठाकर कंधों पर उठाते हुए खतरनाक पहाड़ी रास्तों से ले जाने को मजबूर हुए।ग्रामीणों का कहना है कि नेता चुनाव के समय तो गांव में वोट मांगने आते हैं। लेकिन चुनाव जीतने के बाद गांव की तरफ मुड़कर नहीं देखते। इस कारण दुख-तकलीफ में सेवा गांव के ग्रामीण इसी तरह कठिनाईयों भरा जीवन जीने को मजबूर हैं।

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