उत्तराखंड में फर्जी डिग्री के सहारे पाई सरकारी नौकरी, विभाग ने असिस्टेंट प्रोफेसर सेवा से बर्खास्त

News Desk
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यमकेश्वर के राजकीय महाविद्यालय बिथ्याणी में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर नौकरी कर रहे असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. उमेश त्यागी को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने विभागीय जांच में दोषी पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की है।

देहरादून। राजकीय महाविद्यालय बिथ्याणी, यमकेश्वर में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर नौकरी करने वाले असिस्टेंट प्रोफेसर डा उमेश त्यागी को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। विभागीय जांच में दोषी पाए जाने के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने कार्रवाई करते हुए उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं।

उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार डा. उमेश त्यागी की नियुक्ति राजकीय महाविद्यालय बिथ्याणी में कला संकाय के अंतर्गत इतिहास विषय के असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर हुई थी। नियुक्ति के समय प्रस्तुत किए गए शैक्षणिक अभिलेखों की सत्यता को लेकर विभाग को शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसके बाद मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई गई।

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जांच में डा. त्यागी द्वारा प्रस्तुत बीए प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष की अंकतालिकाओं में गंभीर विसंगतियां पाई गईं। विभाग ने संबंधित अभिलेखों का सत्यापन चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से कराया, लेकिन प्रस्तुत दस्तावेज विश्वविद्यालय के आधिकारिक रिकार्ड से मेल नहीं खाए।

जांच के दौरान डा. त्यागी को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर भी दिया गया, लेकिन वह स्पष्टीकरण देने के लिए उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद उत्तराखंड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली के तहत उनकी सेवा समाप्ति का प्रस्ताव उच्च शिक्षा मंत्री डा धन सिंह रावत को भेजा गया, जिसे उन्होंने मंजूरी दे दी।

उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों की गरिमा और युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का छल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर नौकरी प्राप्त करना गंभीर अपराध है और भविष्य में भी ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई जारी रहेगी

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