हरिद्वार में वेज बिरयानी के बोर्ड का विरोध, साधु-संतों ने लगवाए वेज पुलाव के स्टिकर

News Desk
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हरिद्वार में अखंड परशुराम अखाड़े के साधु-संतों ने ‘वेज बिरयानी’ के बोर्डों का विरोध किया और उन्हें ‘वेज पुलाव’ में बदलने की अपील की।

हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में खाद्य पदार्थों के नामकरण को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। अखंड परशुराम अखाड़े के नेतृत्व में साधु-संतों ने शनिवार को शहर के विभिन्न क्षेत्रों में चलाए गए एक विशेष अभियान के तहत वेज बिरयानी के नाम से लगाए गए बोर्डों और होर्डिंग्स का विरोध किया।

इस दौरान संगठन के पदाधिकारियों और संतों ने कई ठेलियों एवं दुकानों पर लगे ‘वेज बिरयानी’ के बोर्डों पर ‘वेज पुलाव’ के स्टिकर चस्पा किए और दुकानदारों से भविष्य में अपने प्रतिष्ठानों पर नाम परिवर्तन करने की अपील की।अभियान के दौरान अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक, स्वामी कार्तिक गिरी महाराज, कथा व्यास पंडित पवन कृष्ण आचार्य सहित बड़ी संख्या में साधु-संत मौजूद रहे। संतों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष या व्यापार का विरोध करना नहीं है, बल्कि तीर्थनगरी की धार्मिक एवं सांस्कृतिक मर्यादाओं को बनाए रखना है।

लगातार मिल रही थीं शिकायतें : अधीर कौशिकअखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि संगठन को लंबे समय से शिकायतें प्राप्त हो रही थीं कि हरिद्वार में अनेक स्थानों पर वेज पुलाव को ‘वेज बिरयानी’ के नाम से बेचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि संगठन स्वयं भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए था।

उन्होंने कहा कि हरिद्वार विश्व प्रसिद्ध धार्मिक नगरी है और आने वाले समय में यहां कांवड़ मेला तथा वर्ष 2027 का महाकुंभ आयोजित होना है।ऐसे में तीर्थनगरी की सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक मर्यादा को ध्यान में रखते हुए दुकानदारों से आग्रह किया गया है कि वे अपने बोर्डों पर ‘वेज बिरयानी’ की जगह ‘वेज पुलाव’ लिखें।पंडित कौशिक ने कहा कि अभियान के दौरान दुकानदारों से सौहार्दपूर्ण तरीके से बातचीत की गई और उन्हें नाम परिवर्तन के लिए प्रेरित किया गया। कई स्थानों पर संगठन की ओर से ‘वेज पुलाव’ के स्टिकर भी लगाए गए।

रोजगार नहीं, केवल नाम को लेकर है आपत्ति : स्वामी कार्तिक गिरीस्वामी कार्तिक गिरी महाराज ने मीडिया से बातचीत में कहा कि संगठन किसी भी व्यक्ति के रोजगार या व्यवसाय के खिलाफ नहीं है।उन्होंने कहा कि लोगों को भोजन बेचने और व्यापार करने का पूरा अधिकार है, लेकिन धार्मिक नगरी में खाद्य पदार्थों के नामकरण को लेकर भी संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए।उन्होंने कहा कि लगातार यह देखने में आ रहा था कि वेज पुलाव को वेज बिरयानी कहकर बेचा जा रहा है। इसी को लेकर संत समाज ने एक जनजागरण अभियान शुरू किया है। उनका कहना था कि संगठन का उद्देश्य केवल नाम परिवर्तन है, न कि किसी की दुकान बंद कराना या व्यापार प्रभावित करना।

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