देहरादून: उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (UKTU) में पेपर लीक का बड़ा मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय ने सम सेमेस्टर 2025-26 की दो विषयों की परीक्षाएं तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी हैं। जांच में परीक्षा की गोपनीयता भंग होने की पुष्टि के बाद यह कार्रवाई की गई। विश्वविद्यालय के अनुसार, Machine Learning for Internet of Things और Electromagnetic Field Theory विषयों के प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले सोशल मीडिया पर वायरल होने की शिकायत मिली थी। जांच में सामने आया कि एक बाहरी पेपर सेटर द्वारा तैयार किए गए प्रश्नपत्रों की गोपनीयता प्रभावित हुई। जांच रिपोर्ट में देहरादून के एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज के सहायक प्रोफेसर पर छात्रों के पोर्टल और व्हाट्सएप ग्रुप में परीक्षा से जुड़े समान प्रश्न साझा करने के आरोप लगे हैं। मामले को गंभीर मानते हुए विश्वविद्यालय ने संबंधित बाहरी पेपर सेटर को सात वर्षों के लिए सभी परीक्षा संबंधी कार्यों से प्रतिबंधित कर दिया है। विश्वविद्यालय ने बताया कि दोनों विषयों की पुनः परीक्षा अगस्त के तीसरे सप्ताह में आयोजित की जाएगी। छात्रों से केवल आधिकारिक सूचना पर भरोसा करने की अपील की गई है
कुलपति ने विशेष शक्तियों का किया प्रयोग
विश्वविद्यालय ने कहा कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता, पारदर्शिता और छात्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कुलपति द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग कर IOTT004 (Machine Learning for Internet of Things) तथा ECT043 (Electromagnetic Field Theory) विषयों की पूर्व में आयोजित परीक्षाओं को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है। विश्वविद्यालय ने अधिसूचना में स्पष्ट किया है कि दोनों विषयों की पुनर्परीक्षा अगस्त 2026 के तीसरे सप्ताह में आयोजित होगी। पुनर्परीक्षा की विस्तृत डेटशीट और परीक्षा केंद्रों की सूची विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर अलग से जारी की जाएगी।
आरोपी प्रोफेसर पर सात साल का प्रतिबंध
विश्वविद्यालय ने मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए आशीष कुमार गुप्ता, सहायक प्रोफेसर, शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, देहरादून को विश्वविद्यालय के सभी परीक्षा संबंधी कार्यों से अगले सात वर्षों के लिए तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया है।
कॉलेज को भी मिली कड़ी चेतावनी
विश्वविद्यालय ने संबंधित संस्थान शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, देहरादून को भी कड़े शब्दों में चेतावनी जारी की है। अधिसूचना में कहा गया है कि संस्थान स्तर पर पर्याप्त निगरानी और नियंत्रण सुनिश्चित नहीं किया गया, जिसके कारण इतनी गंभीर स्थिति उत्पन्न हुई। विश्वविद्यालय ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए संस्थान को सभी शिक्षकों के स्तर पर परीक्षा प्रणाली की गोपनीयता और शुचिता बनाए रखने की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

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