प्रशिक्षण के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश, अब तक 200 पौधों का सफल रोपण; देवदार, बांज, बुरांश समेत कई प्रजातियों के पौधे लगाए
टिहरी। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के टिहरी परिसर में पर्यावरण संरक्षण और विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के उद्देश्य से संचालित “एक प्रशिक्षणार्थी, एक पेड़” योजना ने अपने तीसरे वर्ष में प्रवेश कर लिया है। खास बात यह है कि इस अभिनव पहल को अब पाठ्यक्रम का हिस्सा भी बनाया गया है। इससे विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रशिक्षण के साथ-साथ उनमें पर्यावरण संरक्षण की व्यावहारिक समझ भी विकसित हो रही है।इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी अपने इंटर्नशिप के प्रथम दिवस पर एक पौधे का रोपण कर अपने प्रशिक्षण की शुरुआत करता है। पौधा लगाने के बाद उसकी देखभाल की जिम्मेदारी भी संबंधित प्रशिक्षणार्थी की होती है। प्रशिक्षणार्थी प्रतिदिन पौधे को पानी देने के साथ-साथ उसकी निराई-गुड़ाई और आवश्यक देखभाल करता है। इस पूरी प्रक्रिया के माध्यम से विद्यार्थियों को केवल पौधरोपण तक सीमित न रहकर उसके संरक्षण और संवर्धन का महत्व समझाया जाता है।
स्थानीय और पर्यावरण अनुकूल प्रजातियों पर जोर
इस वर्ष योजना के तहत परिसर में देवदार, बांज, ग्वीराल, पंय्या, बुरांश सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया। पहाड़ी पर्यावरण के अनुकूल इन प्रजातियों का चयन स्थानीय जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र को ध्यान में रखते हुए किया गया है। इससे परिसर को हराभरा बनाने के साथ-साथ विद्यार्थियों को उत्तराखंड की पारंपरिक एवं स्थानीय वनस्पतियों से भी जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रशिक्षण के साथ मूल्यांकन भी“
एक प्रशिक्षणार्थी, एक पेड़” योजना की विशेषता यह है कि इसे केवल एक औपचारिक पौधरोपण कार्यक्रम के रूप में नहीं चलाया जा रहा है। प्रशिक्षणार्थी अपने लगाए गए पौधे की इंटर्नशिप के प्रथम दिवस से लेकर प्रशिक्षण पूर्ण होने तक की पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड तैयार करता है।प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रशिक्षणार्थी पौधे के रोपण, देखभाल, विकास और उससे जुड़ी गतिविधियों की एक समग्र रिपोर्ट तैयार कर संबंधित विभाग में जमा करता है। इस रिपोर्ट का मूल्यांकन शिक्षकों द्वारा किया जाता है और इसके आधार पर प्रशिक्षणार्थी को अंक भी प्रदान किए जाते हैं। इस तरह पर्यावरण संरक्षण की गतिविधि को विद्यार्थियों की अकादमिक प्रक्रिया से भी जोड़ा गया है।
अब तक 200 पौधों का सफलता पूर्वक रोपण
विश्वविद्यालय परिसर की इस पहल के अंतर्गत अब तक करीब 200 पौधों का सफलतापूर्वक रोपण किया जा चुका है। विद्यार्थियों द्वारा नियमित रूप से पौधों की देखभाल किए जाने से इस अभियान को महज एक दिन के पौधरोपण कार्यक्रम के बजाय निरंतर चलने वाली पर्यावरणीय पहल का स्वरूप मिला है।इस योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों में यह भावना विकसित करना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी विभागों या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति इसमें अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। एक विद्यार्थी द्वारा एक पौधे की जिम्मेदारी लेना भविष्य में पर्यावरण के प्रति उसके व्यवहार में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
शिक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण की सीख
की यह पहल शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण के बीच बेहतर समन्वय का उदाहरण बनकर सामने आई है। विद्यार्थियों को कक्षा में पर्यावरण से संबंधित विषयों की जानकारी देने के साथ ही उन्हें धरातल पर पौधों की देखभाल का अनुभव भी प्राप्त हो रहा है। इससे उनमें जिम्मेदारी, अनुशासन, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और सामुदायिक सहभागिता जैसे गुण विकसित होने की उम्मीद है।योजना के प्रेरक एवं संचालन में शिक्षा संकाय की संकायाध्यक्ष एवं विभागाध्यक्ष प्रो. सुनीता गोदियाल के साथ डॉ. मनोज नौटियाल, डॉ. नीरज जोशी, डॉ. हेमराज, डॉ. अरविंद कुमार, डॉ. अखिलेश गौतम, डॉ. देवम, डॉ. सुमन लता तथा श्री गौरव तड़ियाल सहित अन्य शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
तीसरे वर्ष में नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ी पहल“
एक प्रशिक्षणार्थी, एक पेड़” योजना का तीसरे वर्ष में प्रवेश करना इस बात का संकेत है कि विश्वविद्यालय परिसर में पर्यावरण संरक्षण को लेकर शुरू की गई यह पहल निरंतर आगे बढ़ रही है। योजना को पाठ्यक्रम से जोड़ने के बाद इसका शैक्षणिक महत्व भी बढ़ गया है।यदि प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी अपने प्रशिक्षण काल के दौरान एक पौधे को रोपित कर उसकी जिम्मेदारी लेता है और उसका संरक्षण करता है, तो आने वाले वर्षों में परिसर में बड़ी संख्या में विकसित वृक्ष तैयार हो सकते हैं। यह पहल न केवल विश्वविद्यालय परिसर की हरियाली बढ़ाने में योगदान देगी, बल्कि विद्यार्थियों को “पढ़ाई के साथ प्रकृति की जिम्मेदारी” का संदेश भी देगी।

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