समर्थ पोर्टल से प्रवेश प्रक्रिया छात्रों के लिए बनी परेशानी का सबब, बार-बार पोर्टल खोलने-बंद करने पर उठे सवाल

News Desk
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देहरादून। समर्थ पोर्टल के माध्यम से उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया को लेकर छात्रों को हो रही परेशानियों पर निजी कॉलेज एसोसिएशन उत्तराखंड ने चिंता जताई है। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सुनील अग्रवाल ने आरोप लगाया कि श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया में समर्थ पोर्टल को बार-बार सीमित अवधि के लिए खोलने और बंद करने से छात्र असमंजस की स्थिति में हैं।

डॉ. अग्रवाल के अनुसार, विश्वविद्यालय की ओर से इस वर्ष समर्थ पोर्टल पर प्रवेश पंजीकरण के लिए पहले 1 मई से 30 जून तक समय निर्धारित किया गया। इसके बाद प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर अलग-अलग चरणों में पंजीकरण की तिथियां बढ़ाई गईं। इनमें 1 जुलाई से 12 जुलाई, 14 जुलाई से 21 जुलाई, 1 जुलाई से 10 अगस्त, 10 अगस्त से 18 अगस्त तथा इसके बाद 19 अगस्त से 26 अगस्त तक पंजीकरण की अवधि निर्धारित की गई है।उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के अधिकारियों को पिछले वर्षों के अनुभव से यह जानकारी रहती है कि प्रवेश प्रक्रिया अगस्त माह तक चलती है। इसके बावजूद समर्थ पोर्टल को बार-बार कुछ दिनों के लिए खोलने और फिर बंद करने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इससे विद्यार्थियों को यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि उन्हें प्रवेश के लिए कब तक पंजीकरण करना है।

डॉ. सुनील अग्रवाल ने कहा कि बार-बार यह घोषणा होने से कि निर्धारित तिथि के बाद पंजीकरण नहीं होंगे, कई छात्र असमंजस में पड़ जाते हैं और बेहतर विकल्प की तलाश में निजी विश्वविद्यालयों अथवा अन्य राज्यों के शिक्षण संस्थानों की ओर रुख कर लेते हैं। इसका सीधा असर स्थानीय महाविद्यालयों में उपलब्ध सीटों पर भी पड़ता है और कई सीटें रिक्त रह जाती हैं।उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रत्येक वर्ष प्रवेश प्रक्रिया अगस्त तक चलती है तो समर्थ पोर्टल को एक साथ लंबी अवधि के लिए क्यों नहीं खोला जाता। उन्होंने सुझाव दिया कि विद्यार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए 1 जून से 31 अगस्त तक लगातार समर्थ पोर्टल खुला रखने की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि छात्र अपनी सुविधा के अनुसार समय पर पंजीकरण कर सकें।

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि प्रवेश प्रक्रिया का उद्देश्य विद्यार्थियों को सुविधा देना होना चाहिए, न कि उन्हें बार-बार नई तिथियों और घोषणाओं के बीच उलझाना। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि छात्रहित में प्रवेश प्रक्रिया को सरल, स्पष्ट और निरंतर बनाया जाए, जिससे विद्यार्थियों के साथ-साथ महाविद्यालयों को भी अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।

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