सितंबर से उत्तराखंड में गरमाएगा सियासी माहौल, पहाड़ में प्रियंका तो मैदान में राहुल को उतारेगी कांग्रेस

News Desk
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उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस अगले माह से अपने राष्ट्रीय नेताओं को मैदान में उतारेगी। राहुल गांधी हरिद्वार व ऊधम सिंह नगर में, जबकि प्रियंका गांधी चमोली व अल्मोड़ा में रैलियां करेंगी

देहरादून। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी कांग्रेस अब अगले माह से अपने राष्ट्रीय नेताओं को फिर से अलग-अलग क्षेत्रों में उतारकर सियासी माहौल गर्माने जा रही है। इस कड़ी में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के कार्यक्रमों की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

सितंबर में राहुल की मैदानी जिलों हरिद्वार व ऊधम सिंह नगर में सभाएं और रैलियां कराने की तैयारी है, जबकि प्रियंका को पर्वतीय जिलों चमोली व अल्मोड़ा में उतारने की योजना है। पार्टी हाईकमान से विमर्श कर प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व प्रस्तावित रैलियों की तिथियां जल्द ही तय करेगा।

दिल्ली में हुई बैठक में बनी सहमति

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी देहरादून में छात्रों की गूंज कार्यक्रम में छात्रों-युवाओं से संवाद कर चुके हैं, जबकि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आठ अगस्त को हल्द्वानी रैली के माध्यम से चुनावी बिगुल फूंका था। एसआइआर की प्रक्रिया होने के बाद अगले माह से पार्टी अपने बड़े नेताओं को फिर से मैदान में उतारने जा रही है। हाल में पार्टी की प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा की अध्यक्षता में दिल्ली में हुई बैठक में इस पर सहमति बनी थी।पार्टी के सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी मैदानी क्षेत्रों के दौरे में युवाओं, रोजगार, महंगाई और विकास से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाएंगे। वहीं पर्वतीय जिलों में प्रियंका गांधी के कार्यक्रमों में पलायन, महिलाओं की भूमिका, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को केंद्र में रखा जाएगा।

राहुल और प्रियंका के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, महासचिव केसी वेणुगोपाल, वरिष्ठ नेता सचिन पायलट समेत अन्य नेताओं के दौरे भी प्रस्तावित हैं। कांग्रेस की रणनीति राष्ट्रीय नेतृत्व की सक्रियता के साथ स्थानीय संगठन को मजबूत करने की है। पार्टी चाहती है कि बड़े नेताओं की रैलियों को केवल शक्ति प्रदर्शन तक सीमित न रखा जाए, बल्कि प्रत्येक क्षेत्र के स्थानीय मुद्दों को चुनावी अभियान का हिस्सा बनाया जाए।

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