ठोस कचरा प्रबंधन में जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की भागीदारी जरूरी

News Desk
5 Min Read

उत्तराखंड के 1,314 वार्डों में 100 फीसदी डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण, दिसंबर 2026 तक पुराने कचरे के निस्तारण में तेजी का लक्ष्य

लोकजन एक्सप्रेस देहरादून। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और पर्यटन गतिविधियों के बीच उत्तराखंड में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए सरकार के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों, स्थानीय निकायों, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी को आवश्यक बताया गया है। वैज्ञानिक एवं डेटा आधारित कचरा प्रबंधन व्यवस्था को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू करने पर ही स्वच्छ पर्यावरण और बेहतर शहरी व्यवस्था का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

बुधवार को सचिवालय मीडिया सेंटर में पीआईबी, देहरादून की ओर से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने ठोस कचरा प्रबंधन की मौजूदा स्थिति और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के तहत एक अप्रैल 2026 से कचरे को चार अलग-अलग धाराओं—गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाला कचरा—में अलग करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि राज्य के 108 शहरी स्थानीय निकायों के 1,314 वार्डों में 100 प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की व्यवस्था उपलब्ध है। इसके लिए प्रदेश में करीब 1,515 वाहन संचालित किए जा रहे हैं तथा अतिरिक्त वाहनों की खरीद की प्रक्रिया जारी है। चार-धारा कचरा पृथक्करण को प्रभावी बनाने के लिए नए वाहनों में चार अलग-अलग कंपार्टमेंट की व्यवस्था की जा रही है। अब तक 1,225 वार्डों में स्रोत पर कचरा पृथक्करण शुरू किया जा चुका है।

प्रतिदिन 1,930 मीट्रिक टन से अधिक कचरा उत्पन्न

अधिकारियों के अनुसार उत्तराखंड में प्रतिदिन करीब 1,930.85 मीट्रिक टन ठोस कचरा उत्पन्न हो रहा है। इसमें से 1,804.59 मीट्रिक टन यानी 93.46 प्रतिशत कचरे का प्रतिदिन प्रसंस्करण किया जा रहा है। प्रदेश में कुल 61 लीगेसी वेस्ट/डंपसाइट चिन्हित की गई हैं।इन डंपसाइटों पर मौजूद करीब 23.34 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे में से अब तक 12.70 लाख मीट्रिक टन यानी 54.41 प्रतिशत कचरे का उपचार किया जा चुका है। सरकार ने दिसंबर 2026 तक पुराने कचरे के उपचार और डंपसाइट रेमेडिएशन में तेजी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

एमआरएफ और कम्पोस्टिंग व्यवस्था को मिल रहा विस्तार

राज्य में वर्तमान में 85 मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF), 663 नाडेप/कम्पोस्ट पिट और 87 प्लास्टिक कॉम्पैक्टर संचालित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही प्रदेश में 1,058 बल्क वेस्ट जनरेटर्स की पहचान की गई है।कचरा संग्रहण और परिवहन व्यवस्था की निगरानी को मजबूत करने के लिए व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम लागू किया जा रहा है। पहले चरण में सभी नगर निगमों को इस व्यवस्था के दायरे में लाया जा रहा है। बल्क वेस्ट जनरेटर्स के लिए डिजिटल पंजीकरण, ऑनलाइन निगरानी और रिपोर्टिंग की व्यवस्था भी लागू की जा रही है।

चारधाम और पर्यटन क्षेत्रों के लिए विशेष व्यवस्था

शहरी विकास विभाग के अपर निदेशक प्रवीण कुमार ने कहा कि चारधाम सहित प्रदेश के प्रमुख पर्यटन और तीर्थ क्षेत्रों में यात्रियों एवं पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए कचरा संग्रहण, पृथक्करण, परिवहन और वैज्ञानिक प्रसंस्करण की विशेष व्यवस्था आवश्यक है।उन्होंने मेयर, पार्षदों और अन्य जनप्रतिनिधियों से लोगों को स्रोत पर कचरा पृथक्करण, प्लास्टिक के जिम्मेदार उपयोग और स्वच्छता नियमों के पालन के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आरडब्ल्यूए, होटल, रेस्तरां और अन्य बल्क वेस्ट जनरेटर्स को भी अपने स्तर पर कचरे के उचित प्रबंधन की जिम्मेदारी निभानी होगी।

पुराने कचरे से तैयार होंगे उपयोगी संसाधन

डंपसाइट रेमेडिएशन के माध्यम से पुराने कचरे को सड़क निर्माण सामग्री, भरान सामग्री, रिसाइकल योग्य वस्तुओं और RDF (Refuse Derived Fuel) जैसे उपयोगी संसाधनों में बदला जा रहा है। इससे डंपसाइटों से होने वाले वायु एवं भूजल प्रदूषण को कम करने के साथ-साथ कचरे में आग लगने की घटनाओं पर भी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

पर्वतीय क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधानों के तहत पर्यटकों से यूजर चार्ज, गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे के लिए विशेष संग्रहण केंद्र और होटल-रेस्तरां में गीले कचरे के विकेंद्रीकृत प्रसंस्करण पर भी जोर दिया जा रहा है।अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ठोस कचरा प्रबंधन केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है।

सरकार, स्थानीय निकाय, जनप्रतिनिधि, व्यापारिक प्रतिष्ठान और आम नागरिक यदि मिलकर जिम्मेदारी निभाएं, तभी उत्तराखंड को स्वच्छ और पर्यावरण के लिहाज से बेहतर राज्य बनाने का लक्ष्य प्रभावी रूप से हासिल किया जा सकेगा।

Visit us: www.sipas.edu.in

Share This Article
Leave a comment