दोहरी जिम्मेदारी पर डीएम का सख्त एक्शन, वरिष्ठ कोषाधिकारी का ड्यूटी रोस्टर तय

News Desk
3 Min Read

तीन दिन कोषागार में मोर्चा, तीन दिन विश्वविद्यालय की वित्तीय व्यवस्था संभालेंगे मनोज कुमार पांडेय

नई टिहरी। श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय, बादशाहीथौल की वित्तीय व्यवस्था को पटरी पर रखने के साथ-साथ नई टिहरी कोषागार के कामकाज को भी सुचारु बनाए रखने के लिए जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। जिलाधिकारी ने वरिष्ठ कोषाधिकारी, नई टिहरी मनोज कुमार पांडेय के दोहरे दायित्व को लेकर बाकायदा ड्यूटी रोस्टर निर्धारित कर दिया है।

वरिष्ठ कोषाधिकारी मनोज कुमार पांडेय अपने पदेन दायित्वों के साथ श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के मुख्य वित्त अधिकारी (CFO) का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे हैं। ऐसे में दोनों संस्थानों के काम प्रभावित न हों, इसके लिए जिलाधिकारी ने सप्ताह के छह कार्य दिवसों को स्पष्ट रूप से विभाजित कर दिया है।

सोमवार, बुधवार और शनिवार—कोषागार में जिम्मेदारी

जारी आदेश के अनुसार वरिष्ठ कोषाधिकारी सोमवार, बुधवार और शनिवार को नई टिहरी कोषागार में उपस्थित रहकर अपने पदेन दायित्वों का निर्वहन करेंगे।वहीं मंगलवार, बृहस्पतिवार और शुक्रवार को वे श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के बादशाहीथौल परिसर में मुख्य वित्त अधिकारी के अतिरिक्त प्रभार से जुड़े वित्तीय कार्यों को संभालेंगे।

डीएम ने साफ कहा—लापरवाही बर्दाश्त नहीं

जिलाधिकारी ने आदेश में स्पष्ट कर दिया है कि निर्धारित कार्य दिवसों में संबंधित कार्यालय में अधिकारी की उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। दोनों जिम्मेदारियों के निर्वहन में किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।यदि निर्धारित कार्य दिवस में किसी बैठक या अन्य आवश्यक शासकीय कार्य के कारण अधिकारी को संबंधित कार्यालय से बाहर जाना पड़ता है, तो इसके लिए पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

दो संस्थानों की वित्तीय व्यवस्था पर सीधी नजर

प्रशासन का यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वरिष्ठ कोषाधिकारी पर अब एक साथ दो अहम वित्तीय जिम्मेदारियां हैं। एक तरफ नई टिहरी कोषागार का नियमित कामकाज है, तो दूसरी ओर विश्वविद्यालय की वित्तीय व्यवस्थाओं और CFO से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी है।डीएम द्वारा तय रोस्टर से दोनों संस्थानों में अधिकारी की उपलब्धता को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है। प्रशासन का उद्देश्य है कि न तो कोषागार का काम प्रभावित हो और न ही विश्वविद्यालय के वित्तीय मामलों में अनावश्यक देरी हो।जिलाधिकारी का यह आदेश प्रशासनिक अनुशासन के साथ-साथ जवाबदेही और समयबद्ध वित्तीय कार्यों को लेकर भी सख्त संदेश माना जा रहा है।

visit us: www.sipas.edu.in

Share This Article
Leave a comment