दिवंगत लोक कलाकारों, साहित्यकारों और सांस्कृतिक विभूतियों को किया जाएगा स्मरण, सांस्कृतिक महासंवाद में भविष्य की दिशा पर होगा मंथन
देहरादून। उत्तराखण्ड की लोकसंस्कृति, कला, साहित्य, संगीत और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने के उद्देश्य से ‘आवाज़ सुनो पहाड़ों की’ एवं ‘शारदा स्वर संगम’ के संयुक्त तत्वावधान में ‘श्रद्धा–सम्मान : लोकपितृ स्मरण समारोह 2026’ का आयोजन 2 से 4 अक्टूबर तक किया जाएगा। कार्यक्रम संस्कृति विभाग ऑडिटोरियम, हरिद्वार बाईपास रोड, देहरादून में प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से रात्रि 8 बजे तक आयोजित होगा।आयोजकों के अनुसार पितृपक्ष की सांस्कृतिक भावना को उत्तराखण्ड की लोककला और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हुए यह समारोह उन दिवंगत कलाकारों, साहित्यकारों, फिल्मकारों एवं सांस्कृतिक विभूतियों को ‘लोकपितर’ के रूप में स्मरण करने का प्रयास है, जिन्होंने अपनी साधना और रचनात्मक योगदान से उत्तराखण्ड की लोकभाषा, लोकसंगीत, साहित्य और संस्कृति को समृद्ध किया।
परिजनों का सम्मान और अमर गीतों से नमन
समारोह के दौरान दिवंगत सांस्कृतिक विभूतियों के परिवारजनों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही उनके गीतों, रचनाओं और योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए ‘अमर गीतों से नमन’ सहित विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और स्मरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।आयोजकों का कहना है कि किसी कलाकार का जीवन समाप्त हो सकता है, लेकिन उसकी कला और सांस्कृतिक विरासत समाप्त नहीं होनी चाहिए। इसी सोच के साथ समारोह को श्रद्धांजलि तक सीमित न रखते हुए विरासत को भविष्य से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
सांस्कृतिक महासंवाद रहेगा मुख्य आकर्षण
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण ‘सांस्कृतिक महासंवाद’ होगा। इसमें फिल्म एवं फिल्म नीति, नाटक एवं रंगमंच, बोली-भाषा एवं साहित्य, लोक परंपरा, सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक प्रतिभाओं के प्रोत्साहन तथा फिल्मों में संस्कृति, कला एवं साहित्य की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा होगी।इसके अलावा गांवों की संस्कृति से नई संभावनाएं, संस्कृति संरक्षण एवं नीति-निर्माण जैसे विषयों पर भी विशेषज्ञों और संस्कृति से जुड़े लोगों द्वारा विचार-विमर्श किया जाएगा। महासंवाद का उद्देश्य चर्चा के साथ-साथ उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्द्धन के लिए व्यावहारिक सुझाव एवं भविष्य की कार्यदिशा तैयार करना है, जिन्हें शासन, प्रशासन और संबंधित संस्थाओं के समक्ष रखा जा सके।
सांस्कृतिक महासंवाद रहेगा मुख्य आकर्षण
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण ‘सांस्कृतिक महासंवाद’ होगा। इसमें फिल्म एवं फिल्म नीति, नाटक एवं रंगमंच, बोली-भाषा एवं साहित्य, लोक परंपरा, सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक प्रतिभाओं के प्रोत्साहन तथा फिल्मों में संस्कृति, कला एवं साहित्य की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा होगी।
इसके अलावा गांवों की संस्कृति से नई संभावनाएं, संस्कृति संरक्षण एवं नीति-निर्माण जैसे विषयों पर भी विशेषज्ञों और संस्कृति से जुड़े लोगों द्वारा विचार-विमर्श किया जाएगा। महासंवाद का उद्देश्य चर्चा के साथ-साथ उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्द्धन के लिए व्यावहारिक सुझाव एवं भविष्य की कार्यदिशा तैयार करना है, जिन्हें शासन, प्रशासन और संबंधित संस्थाओं के समक्ष रखा जा सके।
गांवों की संस्कृति को रोजगार और नई पीढ़ी से जोड़ने पर जोर
आयोजकों के मुताबिक उत्तराखण्ड की संस्कृति केवल मंचों और संग्रहालयों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी वास्तविक शक्ति गांवों, लोकभाषाओं, लोकगीतों, लोकवाद्यों और परंपराओं में है। समारोह में इस बात पर भी मंथन होगा कि लोकसंस्कृति को रोजगार, पर्यटन, फिल्म, स्थानीय प्रतिभाओं और युवाओं के अवसरों से किस प्रकार जोड़ा जा सकता है।प्रेस कॉन्फ्रेंस में संयोजक नरेंद्र रौथाण, समाजसेवी बलदेव भट्ट, वरिष्ठ लोक कलाकार नन्दलाल भारती, नीरज उनियाल, मंच संचालक कविता बिष्ट, लोक गायिका लीला पयाल, लोक गायिका मीना बिष्ट, मनोज सिंह, प्रीतिक्षा बमराड़ा, पूनम सती सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।

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