लुढ़क सकता हूं, घिस सकता हूं, पर टूट नहीं सकता!” हरीश रावत का विरोधियों को करारा जवाब

News Desk
4 Min Read

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत (‘हरदा’) ने एक बार फिर अपने तेवरों से सूबे की राजनीति में गर्माहट ला दी है। अपने ऊपर हो रहे हमलों, पार्टी के भीतर की खींचतान और भाजपा के ट्रोलिंग तंत्र पर खुलकर बोलते हुए उन्होंने साफ कह दिया कि वे ढलती उम्र में भी संघर्ष करने से पीछे हटने वाले नहीं हैं। सोशल मीडिया पर दिल की बात साझा करते हुए हरदा ने कहा, “लुढ़कते-लुढ़कते, घिसते-घिसते, शून्य में मिल सकता हूँ, लेकिन टूट नहीं सकता हूँ!” उन्होंने खुद को विशुद्ध रूप से उत्तराखंडी, गढ़वाली और कुमाऊंनी बताते हुए कहा कि वर्ष 2002 और 2012 के कठिन दौर में भी वे निष्ठा से पार्टी के साथ खड़े रहे। पार्टी ने भी उन्हें मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री बनाकर सम्मान दिया

जिस दिन भार लगूंगा, घर बैठ जाऊंगा

पार्टी निष्ठा का जिक्र करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके लिए हमेशा पार्टी का हित सबसे ऊपर रहा है। उन्होंने विरोधियों और अपने राजनीतिक साथियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि जिस क्षण उन्हें महसूस होगा या उनसे कहा जाएगा कि वे कांग्रेस के लिए भार बन रहे हैं और घर बैठ जाएं, तो वे बिना पलक झपकाए आदेश मान लेंगे। हालांकि, उन्होंने यह सवाल भी उछाला कि इसका सही आकलन कौन करेगा? ऐसा न हो कि कोई जल्दबाजी में फैसला लिया जाए और बाद में कहा जाए कि इससे पार्टी को नुकसान हुआ।

हरदा बोले, भाजपा आज भी मुझे अपना प्रतिद्वंद्वी मानती है

केंद्र सरकार और राज्य की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए हरीश रावत ने कहा कि उनके पीछे सीबीआई और ईडी यूँ ही नहीं लगाई गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य के अन्य पूर्व मुख्यमंत्रियों और पार्टी अध्यक्षों को तमाम सुविधाएं दी जा रही हैं, लेकिन उन्हें कोई सुविधा नहीं मिलती। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने उनकी छवि बिगाड़ने के लिए सोशल मीडिया पर चार-चार पेज समर्पित कर रखे हैं। हरदा ने चुटकी लेते हुए कहा कि यह इस बात का सबूत है कि इस उम्र में भी भाजपा उन्हें ही अपना सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी मानती है।

कल ‘धन्यवाद यात्रा’ पर भी दी थी सफाई

इससे एक दिन पहले की पोस्ट में हरीश रावत ने ईडी की पूछताछ के बाद नारसन से अपने गांव तक निकाली गई जनसंपर्क और धन्यवाद यात्रा पर उठ रहे सवालों का जवाब दिया था। उन्होंने दिल्ली जाकर कुमारी शैलजा से मुलाकात की बात स्वीकारते हुए कहा था कि उन्हें ‘तलब’ नहीं किया गया था, बल्कि वे खुद अपनी बात स्पष्ट करने गए थे। उन्होंने कहा था कि उनकी इस यात्रा ने कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरा है, जिससे पार्टी मजबूत हुई है, कमजोर नहीं। उन्होंने कहा था कि वह कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से भी मिलेंग। अंत में हरीश रावत ने अपने समर्थकों को भरोसा दिलाते हुए कहा था कि जब भी कांग्रेस या उत्तराखंड के हितों पर चोट होगी, उनकी आत्मा चीखेगी और वे पूरी ताकत से उसका मुकाबला करेंगे।

visit us: www.sipas.edu.in

Share This Article
Leave a comment