अशासकीय विद्यालय प्रबंधक एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और शिक्षा निदेशक को भेजा पत्र, शिक्षा व्यवस्था में सुधार की उठाई मांग
देहरादून। सरकारी और अशासकीय विद्यालयों में छात्रों की लगातार घटती संख्या को लेकर अशासकीय विद्यालय प्रबंधक एसोसिएशन ने चिंता व्यक्त की है। एसोसिएशन ने इसके लिए सरकारी नीतियों और शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त कमियों को जिम्मेदार ठहराते हुए देश के प्रधानमंत्री, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री, प्रदेश के शिक्षा मंत्री तथा शिक्षा निदेशक को पत्र भेजकर अशासकीय विद्यालयों के प्रति शासन के रवैये पर गहरा असंतोष जताया है।
एसोसिएशन के संरक्षक डॉ. सुनील अग्रवाल ने जानकारी देते हुए कहा कि अशासकीय विद्यालयों को शासन की ओर से किसी भी प्रकार की पर्याप्त सहायता नहीं मिलती है। वहीं, सरकारी नीतियों में सरकारी और अशासकीय विद्यालयों के बीच दोहरा रवैया अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अशासकीय विद्यालयों की समस्याओं और आवश्यकताओं की अनदेखी का असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है, जिसके कारण विद्यालयों में छात्र संख्या लगातार कम होती जा रही है।
डॉ. अग्रवाल ने शिक्षकों की नियुक्ति के लिए आयोग के गठन के निर्णय पर भी सवाल उठाते हुए इसे विद्यालय प्रबंधकों के अधिकारों का हनन बताया। उनका कहना है कि सरकारी और अशासकीय विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति योग्यता के आधार पर होनी चाहिए तथा विद्यालय प्रबंधन को निर्धारित नियमों के तहत आवश्यक अधिकार मिलने चाहिए।
सरकार से प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद
अशासकीय विद्यालय प्रबंधक एसोसिएशन ने अपने पत्र के माध्यम से सरकार से विद्यालयों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने, सरकारी और अशासकीय विद्यालयों के बीच नीतिगत असमानताओं को दूर करने तथा शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।डॉ. सुनील अग्रवाल ने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और शिक्षा निदेशक संगठन द्वारा भेजे गए पत्रों का संज्ञान लेकर विद्यालयों की समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई करेंगे।


