तुंगनाथ और मदमहेश्वर धाम के कपाट खुलने की तिथियां घोषित, यात्रा तैयारियां तेज

News Desk
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पंचकेदारों में द्वितीय केदार मदमहेश्वर और तृतीय केदार तुंगनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथियां वैशाखी पर्व पर घोषित की गईं।

रुद्रप्रयाग। पंचकेदारों में द्वितीय केदार भगवान मदमहेश्वर और तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट खोलने की तिथियां वैशाखी पर्व के पावन अवसर पर शीतकालीन गद्दी स्थलों में पंचांग गणना के अनुसार विधिवत घोषित कर दी गई हैं। तिथियों की घोषणा के साथ ही दोनों धामों की यात्रा तैयारियां भी तेज हो गई हैं।

घोषित कार्यक्रम के अनुसार भगवान तुंगनाथ के कपाट 22 अप्रैल को शुभ मुहूर्त में मिथुन लग्न में ग्रीष्मकाल के लिए खोले जाएंगे। इससे पूर्व 20 अप्रैल को भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली शीतकालीन गद्दी स्थल मक्कूमठ से रवाना होगी और प्रथम रात्रि प्रवास भूतनाथ मंदिर में करेगी, जहां स्थानीय श्रद्धालुओं द्वारा नए अन्न का भोग अर्पित कर भव्य पुणखी मेले का आयोजन किया जाएगा।

21 अप्रैल को डोली विभिन्न पड़ावों से होते हुए चोपता पहुंचेगी और 22 अप्रैल को चोपता से प्रस्थान कर सुरम्य बुग्यालों के बीच तुंगनाथ धाम पहुंचेगी, जहां कपाट विधिवत खोल दिए जाएंगे।वहीं भगवान मदमहेश्वर के कपाट 21 मई को कर्क लग्न में शुभ मुहूर्त के अनुसार खोले जाएंगे। इसके लिए 17 मई को ओंकारेश्वर मंदिर (शीतकालीन गद्दी स्थल) में चल विग्रह मूर्तियों को गर्भगृह से सभा मंडप में विराजमान किया जाएगा। 18 मई को भक्तों को डोली दर्शन होंगे और 19 मई को डोली ओंकारेश्वर मंदिर से कैलाश के लिए प्रस्थान करेगी। यात्रा के दौरान डोली डगवाड़ी, ब्राह्मणखोली, मंगोलचारी, मनसूना, राऊलैंक, उनियाणा जैसे विभिन्न पड़ावों पर श्रद्धालुओं को दर्शन देती हुई रात्रि प्रवास के लिए राकेश्वरी मंदिर रासी पहुंचेगी।

20 मई को डोली रासी से गौंडार गांव पहुंचेगी और 21 मई को बनातोली, खटारा, नानौ, मैखम्भा व कूनचट्टी होते हुए मदमहेश्वर धाम पहुंचेगी, जहां कर्क लग्न में कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। वैशाखी पर्व पर ओंकारेश्वर मंदिर में बूढ़ा मदमहेश्वर के पुष्पक विमान ने भी भक्तों को आशीर्वाद दिया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने जौ की हरियाली और विविध पुष्प अर्पित कर विश्व कल्याण की कामना की।

कार्यक्रम में मंदिर समिति सदस्य, पुजारी, प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, व्यापारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। तिथियों की घोषणा के साथ ही क्षेत्र में धार्मिक उत्साह और आस्था का माहौल है।

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