गौरवशाली 100 वर्ष पूरे, सिलोगी इंटर कॉलेज ने रचा नया इतिहास
द्वारीखाल/पौड़ी गढ़वाल। राजकीय इंटर कॉलेज सिलोगी का शताब्दी समारोह 25 एवं 26 अप्रैल को हर्षोल्लास और भव्यता के साथ आयोजित किया जा रहा है। दो दिवसीय इस आयोजन के प्रथम दिन बड़ी संख्या में पूर्व छात्र, पूर्व शिक्षक एवं क्षेत्रीय जनता की गरिमामयी उपस्थिति रही। पूरे परिसर में विद्यालय के प्रति श्रद्धा और उत्साह का विशेष माहौल देखने को मिला।
पौड़ी जनपद के प्रसिद्ध शिक्षण संस्थान सिलोगी इंटर कॉलेज ने अपने स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने पर भव्य शताब्दी समारोह का आयोजन किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर विद्यालय परिसर में पूर्व छात्र, शिक्षकों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सैकड़ों अभिभावकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
समारोह में भारतीय रेलवे से सेवानिवृत्त 95 वर्षीय ग्राम उत्तिण्डा निवासी भगत सिंह रावत आकर्षण का केंद्र रहे। उन्होंने अपने संबोधन में विद्यालय के प्रारंभिक दौर की स्मृतियों को साझा करते हुए बताया कि वर्ष 1943 से 1946 तक उन्होंने यहां अध्ययन किया। उस समय गढ़वाल क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था अत्यंत कमजोर थी। छात्रावास में फूस की छत होती थी, जो बारिश में टपकती रहती थी और कई बार छात्रों को छाता ओढ़कर पढ़ाई करनी पड़ती थी। छात्र जमीन पर बैठकर शिक्षा ग्रहण करते थे।कार्यक्रम संयोजक एवं पूर्व अध्यापक मोहनलाल बिंजोला ने बताया कि वर्ष 1926 में संत सदानंद कुकरेती के नेतृत्व में स्थानीय लोगों ने ढोल-दमाऊ के साथ 2 अप्रैल को इस विद्यालय की स्थापना राष्ट्रीय पाठशाला के रूप में की थी। उस समय यह क्षेत्र पूरी तरह निर्जन था और सड़क, बिजली व पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव था। “जय बद्री विशाल” और “जय सिल्सू देवता” के जयघोष के साथ इस शिक्षा मंदिर की नींव रखी गई।विद्यालय के प्रधानाचार्य विनोद रावत ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि शताब्दी वर्ष का यह अवसर विद्यालय के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होने वाला है। उन्होंने कहा कि जिन महान विभूतियों ने इस पौधे को रोपा था, वह आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है।कार्यक्रम के दौरान ‘उमंग’ पत्रिका के तृतीय संस्करण का विमोचन किया गया। आकाशवाणी नजीबाबाद से सेवानिवृत्त चक्रधर कंडवाल ने पत्रिका की सराहना करते हुए संपादकीय टीम को बधाई दी। साथ ही पंडित नंदादत्त कुकरेती स्मृति ग्रंथ का भी विमोचन किया गया, जिसकी संपादक डॉ. नीता कुकरेती हैं।सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दर्शकों का मन मोह लिया। गढ़वाली गीत-संगीत पर दर्शक झूम उठे, जबकि हास्य कलाकार संदीप छिलबट की प्रस्तुति ने सभी को हंसी से लोटपोट कर दिया। कार्यक्रम में ग्वील हर्बल द्वारा लेमन ग्रास उत्पादों की प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही।

समारोह में विद्यालय को भूमि दान देने वाले स्व. तारादत्त भट्ट, स्व. संत सदानंद कुकरेती एवं स्व. नंदादत्त कुकरेती के परिजनों को सम्मानित किया गया। वर्ष 1959 के पूर्व छात्र तेजराम बड़थ्वाल ने अपने छात्र जीवन की यादें साझा करते हुए बताया कि उस समय विद्यालय में सीमित भवन थे और कृषि के माध्यम से विद्यालय को आर्थिक सहयोग मिलता था।कार्यक्रम का शुभारंभ श्री सिद्धबली गुरुकुल संस्कृत विद्यालय कोटद्वार के ऋषि कुमारों द्वारा स्वस्तिवाचन एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।मुख्य अतिथि विधायक रेनू बिष्ट सहित बीना राणा, मीरा रतूड़ी, महेंद्र सिंह राणा, अर्जुन नेगी और सुरेंद्र सिंह नेगी समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पूर्व शिक्षक, कर्मचारी, छात्र एवं स्थानीय लोग शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन प्रवक्ता राजीव थपलियाल एवं वी.के. सिंह ने संयुक्त रूप से किया।पूर्व छात्र पृथ्वीधर काला ने स्व. मणीराम काला एवं स्व. पुरुषोत्तमदत्त कुकरेती को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं शिक्षामंत्री की उपस्थिति भी होनी चाहिए थी।समारोह के दूसरे दिन 26 अप्रैल को गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी अपनी टीम के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुति देंगे, जिसके साथ ही शताब्दी समारोह का समापन होगा।


