बीएचयू में उत्तराखंड के शिक्षकों ने जाना भारतीय ज्ञान परंपरा एवं नवाचार आधारित शिक्षा का मॉडल

News Desk
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04 अगस्त 2026बीएचयू में उत्तराखंड के शिक्षकों ने जाना भारतीय ज्ञान परंपरा एवं नवाचार आधारित शिक्षा का मॉडलउत्तराखंड शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा संचालित “मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन एवं ज्ञानवर्धन प्रशिक्षण योजना” के अंतर्गत राज्य के विभिन्न राजकीय महाविद्यालयों से चयनित 40 शिक्षकों का दल समूह समन्वयक डॉ. अजीत सैनी के नेतृत्व में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), वाराणसी में आयोजित छह दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहभागिता कर रहा है।कार्यक्रम के द्वितीय दिवस मंगलवार को शिक्षकों ने विश्वविद्यालय के विभिन्न प्रमुख शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों का भ्रमण कर भारतीय ज्ञान परंपरा, नई शिक्षा नीति, शोध संस्कृति तथा नवाचार आधारित शिक्षण प्रणाली की जानकारी प्राप्त की।भ्रमण की शुरुआत मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र से हुई, जहाँ विभागाध्यक्ष प्रो. सुतापा दास एवं डॉ. ऊषा त्रिपाठी ने प्रतिभागियों का स्वागत किया। इस अवसर पर महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के जीवन, शिक्षा-दर्शन एवं राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर आधारित प्रदर्शनी तथा वृत्तचित्र का अवलोकन कराया गया।इसके बाद शिक्षकों ने भारत अध्ययन केंद्र का भ्रमण किया, जहाँ केंद्र के समन्वयक प्रो. शारदेंदु कुमार तिवारी एवं डॉ. अमित कुमार पाण्डेय ने भारतीय ज्ञान परंपरा, वेद, उपनिषद, महाभारत, बौद्ध एवं जैन साहित्य के अंतर्विषयी अध्ययन तथा नई शिक्षा नीति के अनुरूप संचालित पाठ्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्र का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक वैश्विक परिप्रेक्ष्य में स्थापित करना है।शारीरिक शिक्षा विभाग में प्रो. भुवन चंद्र कापड़ी ने मूल्यपरक शिक्षा, व्यक्तित्व विकास, करियर निर्माण एवं अकादमिक उत्कृष्टता पर व्याख्यान दिया। विभाग की पूर्व अध्यक्ष एवं वर्तमान डीन प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए उत्तराखंड सरकार की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे शैक्षणिक भ्रमण शिक्षकों के व्यावसायिक विकास के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।भ्रमण के अगले चरण में दल ने कृषि विज्ञान संस्थान एवं उसके रिसर्च फार्म का अवलोकन किया। प्रो. मनोज कुमार सिंह ने संस्थान की शिक्षण एवं अनुसंधान गतिविधियों, राष्ट्रीय उपलब्धियों तथा इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम, सतत कृषि, खाद्य सुरक्षा एवं जैविक खेती पर आधारित अनुसंधान कार्यों की जानकारी दी।भ्रमण के दौरान विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों ने उत्तराखंड सरकार, उच्च शिक्षा विभाग तथा काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण एवं शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम उच्च शिक्षा में गुणवत्ता संवर्धन, नवाचार और ज्ञान के आदान-प्रदान को नई दिशा प्रदान करेंगे।कार्यक्रम के दौरान समूह समन्वयक डॉ. अजीत सैनी ने सभी संस्थानों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के अनुभव शिक्षकों के शैक्षणिक दृष्टिकोण को व्यापक बनाते हैं तथा विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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