देहरादून। उत्तराखंड में सरकारी शिक्षक भर्ती को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद प्राथमिक शिक्षा विभाग ने 152 सहायक अध्यापकों के दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। जांच के दायरे में आए शिक्षकों की नियुक्ति पर सवाल उठने के बाद शिक्षा विभाग ने संबंधित शिक्षकों को नोटिस जारी कर आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।जानकारी के अनुसार, जांच का केंद्र बिंदु डीएलएड (D.El.Ed.) प्रशिक्षण में प्रवेश के दौरान प्रस्तुत किए गए स्थायी निवास प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेज हैं। विभाग को आशंका है कि कुछ अभ्यर्थियों ने पात्रता हासिल करने के लिए गलत या भ्रामक दस्तावेजों का इस्तेमाल किया हो सकता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट में मामला पहुंचा, जिसके बाद दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।शिक्षा विभाग ने हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर को छोड़कर 11 जिलों के 152 शिक्षकों को जांच के दायरे में लिया है। इनमें सबसे अधिक मामले पिथौरागढ़ जिले से सामने आए हैं। जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी संबंधित शिक्षकों के अभिलेखों का गहन परीक्षण कर नियमानुसार रिपोर्ट तैयार की जाए।विभाग का कहना है कि प्रत्येक शिक्षक को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या फर्जीवाड़ा साबित होता है तो संबंधित शिक्षक के खिलाफ सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। वहीं, यदि कोई शिक्षक जिला स्तर के निर्णय से असहमत होता है तो उसे उच्च स्तर पर अपील करने का अवसर भी मिलेगा।शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अन्य राज्यों से प्राप्त वैध डीएलएड प्रमाणपत्रों पर कोई रोक नहीं है। कार्रवाई केवल उन मामलों में की जाएगी, जहां दस्तावेजों की सत्यता या पात्रता को लेकर संदेह है।इस मामले ने राज्य की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जांच में बड़े स्तर पर अनियमितताएं सामने आती हैं तो कई शिक्षकों की नियुक्ति रद्द होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल पूरे प्रदेश की नजर इस जांच और उसके अंतिम निष्कर्ष पर टिकी हुई है।

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