बीएचयू में उत्तराखंड उच्च शिक्षा विभाग के शैक्षिक भ्रमण का तीसरा दिन: भारत कला भवन से दृश्य कला और संगीत संकाय तक शिक्षकों ने लिया ज्ञान का अनूठा अनुभव

News Desk
3 Min Read

वाराणसी/हल्द्वानी। उत्तराखंड उच्च शिक्षा विभाग, हल्द्वानी (नैनीताल) द्वारा ‘मुख्यमंत्री-उच्च शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन एवं ज्ञानवर्धन प्रशिक्षण योजना’ के अंतर्गत काशी हिंदू विश्वविद्यालय में आयोजित शैक्षिक भ्रमण कार्यक्रम का तीसरा दिन ज्ञान, संस्कृति और कला के विविध आयामों से परिपूर्ण रहा। इस दौरान प्रतिभागी शिक्षकों ने भारतीय विरासत, कला, संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं को निकट से समझते हुए अपने शैक्षणिक अनुभवों को समृद्ध किया।कार्यक्रम के प्रथम सत्र में शिक्षकों के दल ने वर्ष 1920 में स्थापित प्रसिद्ध भारत कला भवन का भ्रमण किया। संग्रहालय में हड़प्पा सभ्यता से लेकर गुप्त एवं उत्तर-गुप्त काल तक की दुर्लभ मृण्मूर्तियों, प्राचीन कलाकृतियों और ऐतिहासिक धरोहरों का अवलोकन किया गया। इसके साथ ही निधि वीथिका में संरक्षित भारतीय संस्कृति की बहुमूल्य एवं दुर्लभ वस्तुओं को भी प्रतिभागियों ने देखा और उनके ऐतिहासिक महत्व को समझा।भ्रमण के दौरान शिक्षकों ने 12वीं से 20वीं शताब्दी के लघु चित्रों के समृद्ध संग्रह, निकोलस रोरिक वीथिका तथा महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के जीवन एवं योगदान पर आधारित मालवीय वीथिका का भी अवलोकन किया। संग्रहालय निदेशक प्रो. श्रीरूप रायचौधरी, उप-निदेशक डॉ. निशांत, सहायक संग्रहाध्यक्ष डॉ. दीपक भरथन अलथुर एवं डॉ. देवेंद्र बहादुर सिंह ने संग्रहालय की विशेषताओं और ऐतिहासिक महत्व की विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम के अंत में डॉ. अंचलेश कुमार ने समस्त प्रतिभागियों की ओर से भारत कला भवन परिवार का आभार व्यक्त किया।द्वितीय सत्र में शिक्षकों ने बीएचयू के प्रतिष्ठित दृश्य कला संकाय का भ्रमण किया। प्रो. मनीष अरोड़ा के मार्गदर्शन में प्रतिभागियों ने चित्रकला, मूर्तिकला एवं टेक्सटाइल डिजाइन विभागों का अवलोकन किया तथा विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई उत्कृष्ट कलाकृतियों और लाइव स्केचिंग की आधुनिक तकनीकों को करीब से देखा। शिक्षकों ने कला शिक्षा में नवाचार और व्यावहारिक प्रशिक्षण की प्रभावी व्यवस्था की सराहना की।इसके पश्चात प्रतिभागियों ने संगीत एवं मंच कला संकाय का भ्रमण किया, जहां संगीत शास्त्र, गायन, वादन एवं नृत्य की विभिन्न विधाओं की जानकारी प्राप्त की। विभागाध्यक्ष प्रो. संगीता पंडित के मार्गदर्शन में छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत मनमोहक गायन एवं वादन ने सभी प्रतिभागियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के समापन पर प्रशिक्षण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. अजीत कुमार सैनी ने संगीत एवं मंच कला संकाय का आभार व्यक्त करते हुए इस अनुभव को शिक्षकों के लिए अत्यंत प्रेरणादायी बताया।दिनभर के शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक अनुभवों के बाद गंगा तट पर आयोजित भव्य गंगा महाआरती में सहभागिता के साथ शैक्षिक भ्रमण के तीसरे दिवस का भावपूर्ण समापन हुआ। यह भ्रमण शिक्षकों के लिए भारतीय संस्कृति, कला, शिक्षा और परंपरा के विविध आयामों को समझने का एक यादगार एवं ज्ञानवर्धक अवसर साबित हुआ।

visit us: www sipas.edu.in

Share This Article
Leave a comment