कांवड़ यात्रा के दौरान उत्तराखंड में सड़क हादसों का कहर, 5 यात्रियों की मौत; 3 गंगा में बहकर लापता

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हरिद्वार/देहरादून। सावन की कांवड़ यात्रा के बीच उत्तराखंड में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के साथ हादसों का सिलसिला भी सामने आया है। प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर हुए सड़क हादसों में पांच कांवड़ यात्रियों की मौत की सूचना है, जबकि गंगा और अन्य जलधाराओं में बहने के बाद तीन यात्रियों के लापता होने की खबर सामने आई है। लगातार हो रहे हादसों ने यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सतर्कता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

चार सड़क हादसों में पांच कांवड़ यात्रियों की मौत

ताजा रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड में कांवड़ यात्रा के दौरान अलग-अलग स्थानों पर हुए चार सड़क हादसों में पांच कांवड़ यात्रियों की जान चली गई। पहाड़ी मार्गों से लेकर मैदानी इलाकों तक बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही के कारण सड़कों पर यातायात का दबाव बना हुआ है। ऐसे में तेज रफ्तार, वाहन पर नियंत्रण खोना और सड़क की परिस्थितियां हादसों का कारण बन रही हैं।

देवप्रयाग क्षेत्र में भी हाल ही में एक दर्दनाक सड़क हादसे में बोलेरो वाहन गहरी खाई में जा गिरा था। हादसे में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हुई, जबकि एक व्यक्ति घायल हुआ। घटना ने पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत को फिर सामने ला दिया।

गंगा में स्नान के दौरान भी बढ़ा खतरा

कांवड़ यात्रा के दौरान गंगा में स्नान करने पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए तेज बहाव भी चुनौती बना हुआ है। हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों में गंगा में स्नान के दौरान डूबने की कई घटनाएं सामने आई हैं। हाल ही में चंडीगढ़ से कांवड़ लेने पहुंचे चार किशोरों की गंगा में डूबने से मौत की घटना ने भी लोगों को झकझोर दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, एक किशोर को बचाने की कोशिश में अन्य युवक भी गहरे पानी में चले गए और हादसा हो गया।ताजा घटनाक्रम में तीन यात्रियों के गंगा में बहकर लापता होने की जानकारी भी सामने आई है। लापता यात्रियों की तलाश के लिए संबंधित टीमें अभियान चला रही हैं। मानसून के दौरान नदी का जलस्तर और बहाव अचानक बढ़ने से गंगा में उतरना जोखिम भरा हो सकता है।

करोड़ों श्रद्धालुओं की आवाजाही, सुरक्षा बड़ी चुनौती

इस वर्ष कांवड़ यात्रा में भारी संख्या में श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, छह अगस्त तक ही 2 करोड़ 19 लाख 70 हजार से अधिक शिवभक्त यात्रा पूरी कर अपने गंतव्य की ओर लौट चुके थे। इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच यातायात व्यवस्था, पार्किंग, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा प्रबंधन प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।हरिद्वार, ऋषिकेश, नीलकंठ और अन्य प्रमुख मार्गों पर कांवड़ियों की बड़ी संख्या दिखाई दे रही है। कई स्थानों पर यातायात को नियंत्रित करने के लिए रूट डायवर्जन और अतिरिक्त पुलिस बल की व्यवस्था की गई है।

हादसों ने बढ़ाई चिंता

लगातार सामने आ रहे हादसों ने कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सड़क दुर्घटनाओं के साथ-साथ नदी में डूबने की घटनाएं भी प्रशासन के सामने गंभीर चुनौती हैं। खासकर मानसून के दौरान नदी-नालों में पानी का बहाव अचानक तेज हो जाता है, जिससे सामान्य दिखाई देने वाले घाट भी खतरनाक हो सकते हैं।प्रशासन और पुलिस की ओर से श्रद्धालुओं से अपील की जाती रही है कि वे निर्धारित और सुरक्षित स्थानों पर ही स्नान करें तथा नदी के तेज बहाव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें। इसी तरह सड़क यात्रा के दौरान भी यातायात नियमों का पालन करना और वाहन चलाते समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।

आस्था के साथ सुरक्षा भी जरूरी

कांवड़ यात्रा श्रद्धा और आस्था का बड़ा पर्व है, जिसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से लाखों-करोड़ों श्रद्धालु हरिद्वार और उत्तराखंड पहुंचते हैं। लेकिन यात्रा के दौरान सुरक्षा की अनदेखी कई बार गंभीर हादसे का कारण बन जाती है। ऐसे में श्रद्धालुओं के लिए जरूरी है कि वे प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और नदी, सड़क तथा पहाड़ी मार्गों पर विशेष सावधानी बरतें।कांवड़ यात्रा के अंतिम चरण में श्रद्धालुओं की भीड़ और बढ़ने की संभावना के बीच प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि यात्रा सुचारु रहने के साथ-साथ दुर्घटनाओं पर भी प्रभावी ढंग से रोक लगाई जा सके। वहीं, लापता यात्रियों की तलाश जारी है और उनके सकुशल मिलने की उम्मीद की जा रही है।

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