श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय में हर्षोल्लास एवं गरिमापूर्ण वातावरण में मनाया गया 80वाँ स्वतंत्रता दिवस

News Desk
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श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय, बादशाहीथौल में 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशभक्ति एवं राष्ट्रीय गौरव की भावना के साथ विविध कार्यक्रमों का गरिमापूर्ण आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति ’’प्रो. अम्बरीश कुमार महाजन’’ द्वारा विश्वविद्यालय परिसर स्थित ’’शौर्य दीवार’’ पर पुष्प अर्पित कर देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले वीर शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन एवं श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुआ। इसके उपरांत माननीय कुलपति आयोजन स्थल पर पहुँचे, जहाँ राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत ’’वन्दे मातरम” का सामूहिक गायन किया गया। तत्पश्चात माननीय कुलपति जी द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। ध्वजारोहण के पश्चात उपस्थित अधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों द्वारा राष्ट्रगान के माध्यम से राष्ट्र के प्रति अपनी निष्ठा एवं सम्मान व्यक्त किया गया।इस अवसर पर विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति ’’प्रो. अम्बरीश कुमार महाजन’’ ने अपने संबोधन में देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाले महान स्वतंत्रता सेनानियों एवं वीर शहीदों को नमन करते हुए कहा कि स्वतंत्र भारत में स्वतंत्रतापूर्वक जीवन जीने का गौरव असंख्य वीरों के त्याग, तपस्या और बलिदान का परिणाम है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता केवल अधिकारों का बोध नहीं कराती, बल्कि राष्ट्र के प्रति हमारे कर्तव्यों एवं जिम्मेदारियों का भी स्मरण कराती है। कुलपति महोदय ने ’’युवा शक्ति को राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति’’ बताते हुए कहा कि भारत का भविष्य युवाओं के हाथों में है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल रोजगार प्राप्त करने वाले युवा न बनें, बल्कि ’’रोजगार सृजित करने, नवाचार करने और देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाले युवा’’ बनें। उन्होंने विद्यार्थियों को Make in India, Startup एवं Innovation’’ की भावना से जुड़कर आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों का दायित्व केवल विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें ’’ज्ञान, कौशल, चरित्र एवं नैतिक मूल्यों से संपन्न जिम्मेदार नागरिक’’ बनाना भी है। विद्यार्थियों में ईमानदारी, अनुशासन, संवेदनशीलता, राष्ट्रप्रेम एवं सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे मूल्यों का विकास आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मजबूत चरित्र एवं उच्च नैतिक मूल्यों से युक्त युवा ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला बन सकते हैं। कुलपति महोदय ने ’’भ्रष्टाचार के विरुद्ध दृढ़ संकल्प’’ का आह्वान करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक व्यक्ति की ईमानदार भूमिका महत्वपूर्ण है। अपने दायित्वों का पारदर्शिता, निष्ठा एवं ईमानदारी के साथ निर्वहन करना ही राष्ट्र के प्रति सच्ची सेवा है।उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार का आह्वान किया कि सभी अधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी एवं विद्यार्थी मिलकर विश्वविद्यालय को ’’शिक्षा, शोध, नवाचार एवं अकादमिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों’’ तक ले जाने के लिए कार्य करें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की प्रगति किसी एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे विश्वविद्यालय परिवार की सामूहिक जिम्मेदारी है।अपने संबोधन में कुलपति महोदय ने “PHD” को ’’Punctuality, Honesty and Discipline’’ के रूप में परिभाषित करते हुए समय की पाबंदी, ईमानदारी एवं अनुशासन को संस्थागत उत्कृष्टता का आधार बताया। उन्होंने कहा कि यदि विश्वविद्यालय का प्रत्येक सदस्य इन तीन मूल्यों को अपने कार्य एवं आचरण का हिस्सा बना ले, तो विश्वविद्यालय को निश्चित रूप से नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया जा सकता है।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के ’’कुलसचिव श्री दिनेश चन्द्रा’’ ने भी स्वतंत्रता संग्राम के वीर सेनानियों एवं शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने कहा कि देश के वीर शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब हम अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी ’’ईमानदारी, निष्ठा एवं कर्तव्यपरायणता’’ के साथ करें। उन्होंने विश्वविद्यालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों का आह्वान किया कि वे अपने-अपने दायित्वों का पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ निर्वहन करते हुए विश्वविद्यालय की प्रगति में अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि अपने कार्य को पूरी ईमानदारी एवं निष्ठा से करना ही राष्ट्र के प्रति सच्ची देशभक्ति है।कार्यक्रम का ’’संचालन उप परीक्षा नियंत्रक डॉ. हेमंत बिष्ट’’ द्वारा किया गया। समारोह में विश्वविद्यालय के समस्त अधिकारी, शिक्षक एवं कर्मचारीगण तथा ’’बी.सी.ए. विभाग के शिक्षक एवं विद्यार्थी’’ उपस्थित रहे। सभी ने राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर राष्ट्र की एकता, अखंडता एवं समृद्धि के लिए अपने संकल्प को दोहराया।

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