उत्तराखंड: 8 बार विधायक रहे गुलाब सिंह की 100वीं जयंती, जानिए क्यों आज भी याद किया जाता है उनका नाम

News Desk
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हल्द्वानी। उत्तराखंड के गांधी और जननायक के रूप में याद किए जाने वाले स्वर्गीय गुलाब सिंह की 100वीं जन्म जयंती पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई। मोटाहल्दू, लालकुआं विधानसभा क्षेत्र स्थित कार्यालय में उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके योगदान को याद किया गया।श्रद्धांजलि कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि गुलाब सिंह केवल एक राजनेता नहीं थे….बल्कि पहाड़ की जनता के बीच सादगी, संघर्ष, विश्वास और जनसेवा की पहचान थे। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में चकराता और पर्वतीय क्षेत्र के लोगों की समस्याओं और अधिकारों को प्रमुखता से उठाया।

गुलाब सिंह वर्ष 1957 से लगातार कई चुनावों में विजयी रहे। वर्ष 1985 में उन्हें चकराता विधानसभा सीट से निर्विरोध विधायक चुने जाने का गौरव भी हासिल हुआ। अपने राजनीतिक जीवन के दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली।

कार्यक्रम में कहा गया कि गुलाब सिंह का पूरा जीवन जनसेवा के लिए समर्पित रहा। उनकी राजनीतिक सोच में आम लोगों की समस्याओं को समझना और उनके लिए संघर्ष करना प्रमुख रहा। इसी वजह से आज भी उन्हें सम्मान और श्रद्धा के साथ याद किया जाता है।

उनकी राजनीतिक विरासत को उनके पुत्र और वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह ने आगे बढ़ाया। प्रीतम सिंह लगातार चकराता से विधायक चुने गए और उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली। इसके अलावा वह प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी रहे हैं।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि प्रीतम सिंह ने अपने पिता के जनसेवा और संघर्ष के रास्ते को आगे बढ़ाते हुए जनता के अधिकारों, पहाड़ के सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए अपनी राजनीतिक भूमिका निभाई है। उनके राजनीतिक जीवन में जनता से जुड़ाव और जनसेवा की भावना को महत्वपूर्ण बताया गया।

स्वर्गीय गुलाब सिंह की 100वीं जन्म जयंती पर उनके विचारों, संघर्ष और जनसेवा को याद करते हुए उन्हें शत-शत नमन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों को समाज और आमजन के लिए काम करने की प्रेरणा देता रहेगा।

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