स्वामी रामतीर्थ व्याख्यान माला’ के दूसरे सत्र में ज्ञान के दार्शनिक एवं व्यावहारिक पक्षों पर हुआ मंथन
बादशाहीथौल (टिहरी गढ़वाल), 29 अक्टूबर 2026। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के स्वामी रामतीर्थ परिसर, बादशाहीथौल स्थित शिक्षा विभाग में ‘स्वामी रामतीर्थ व्याख्यान माला’ के अंतर्गत द्वितीय व्याख्यान का आयोजन किया गया। ‘भारतीय ज्ञान परंपरा एवं शिक्षा’ विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों, ज्ञान के स्रोतों तथा समकालीन शिक्षा व्यवस्था में इसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम के प्रारंभ में शिक्षा विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. सुनीता गोदियाल ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ा ज्ञान भविष्य के प्रति सकारात्मक एवं दूरदर्शी विचारों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने शिक्षा के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया।मुख्य वक्ता डॉ. प्रेम बहादुर ने भारतीय ज्ञान परंपरा की व्यापकता को रेखांकित करते हुए भारत के भौगोलिक परिवेश, नदियों, तीर्थस्थलों तथा प्राचीन शिक्षा संस्थानों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने श्लोकों के माध्यम से भारतीय संस्कृति एवं ज्ञान की समृद्ध विरासत को प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारत की नदियां, तीर्थस्थल और शिक्षा संस्थान हमारी ज्ञान परंपरा की जीवंत पहचान हैं।अपने व्याख्यान में डॉ. प्रेम बहादुर ने दार्शनिक ज्ञान और सामान्य ज्ञान के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए बताया कि दार्शनिक ज्ञान वास्तविकता एवं सत्य की समझ से संबंधित है, जबकि सामान्य ज्ञान किसी विषयवस्तु अथवा समस्या की व्यावहारिक जानकारी प्रदान करता है।
उन्होंने ज्ञान प्राप्ति के प्रमुख स्रोतों—प्रत्यक्ष, अनुमान, शब्द और उपमान—की व्याख्या की। साथ ही बताया कि ज्ञान केवल संस्थागत शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्तिगत मनन, प्रेक्षण और चिंतन भी ज्ञान अर्जित करने के महत्वपूर्ण माध्यम हैं।कार्यक्रम के अंत में डॉ. नीरज जोशी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने व्याख्यान के प्रमुख बिंदुओं का सार प्रस्तुत करते हुए शिक्षार्थियों एवं शोधार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित शिक्षा के महत्व और उसकी समकालीन उपयोगिता से अवगत कराया। उन्होंने विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा के गहन अध्ययन तथा उसके शैक्षिक एवं व्यावहारिक पक्षों को समझने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने सभी अतिथियों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं बी.एड. प्रशिक्षुओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर डॉ. नीरज जोशी, डॉ. सुमन लता, डॉ. देवम एम., डॉ. मनोज प्रसाद नौटियाल, डॉ. हेम राज, डॉ. अखिलेश कुमार गौतम, श्री अरविन्द कुमार सहित शिक्षा विभाग के शिक्षक, शोधार्थी एवं बी.एड. प्रशिक्षु उपस्थित रहे।


