देहरादून: उत्तराखंड के पीआरडी जवानों ने अपनी दो सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेश सरकार को 17 नवंबर तक का समय दिया है। प्रांतीय रक्षक दल हित संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि तय समयसीमा तक मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया…तो 18 नवंबर को प्रदेशभर के महिला और पुरुष पीआरडी जवान अपने परिवारों के साथ वर्दी पहनकर देहरादून में महारैली और आक्रोश प्रदर्शन करेंगे।सोमवार 2 नवंबर को उत्तरांचल प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठन के प्रदेश अध्यक्ष किशन सिंह रावत ने सरकार से जवानों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि संगठन कई बार ज्ञापन देने और वार्ता के माध्यम से अपनी समस्याएं सरकार तक पहुंचा चुका है…लेकिन अब तक कोई ठोस फैसला नहीं हुआ है।
प्रदेश महासचिव वीर सिंह रावत ने मुख्यमंत्री की ओर से पीआरडी जवानों के लिए हाल में की गई घोषणाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि घोषणाओं का लाभ केवल कागजों और समाचार पत्रों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें जमीन पर लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने वर्ष 2021 में महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में मुख्यमंत्री की ओर से पीआरडी जवानों को 300 दिन का रोजगार देने की घोषणा का जिक्र किया। उनका कहना था कि इस घोषणा को लेकर अब तक शासनादेश जारी नहीं हुआ है। इससे जवानों के मन में नई घोषणाओं के लागू होने को लेकर भी सवाल बने हुए हैं।
संगठन ने अपनी दो प्रमुख मांगें स्पष्ट करते हुए कहा कि पीआरडी जवानों को होमगार्ड जवानों की तरह मूल वेतन के साथ महंगाई भत्ता (DA) दिया जाए और साल के सभी 365 दिन नियमित रोजगार उपलब्ध कराया जाए। संगठन का कहना है कि जवानों को अस्थायी राहत देने के बजाय इन मांगों पर स्थायी निर्णय लिया जाना चाहिए।
प्रदेश नेतृत्व ने कहा कि उत्तराखंड में हजारों पीआरडी जवान लंबे समय से सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद रोजगार की अनिश्चितता और आर्थिक परेशानियों के कारण उनके परिवारों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। संगठन ने सरकार से 17 नवंबर तक मांगों पर फैसला लेने का आग्रह किया है।
संगठन ने दोहराया कि तय समयसीमा तक सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने पर 18 नवंबर को देहरादून में प्रदेशव्यापी महारैली निकाली जाएगी। इसमें महिला और पुरुष जवान परिवार सहित पूर्ण वर्दी में शामिल होंगे। संगठन ने इस स्थिति के लिए शासन, प्रशासन और प्रदेश सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।


