बेसिक शिक्षकों को टीईटी से राहत का भरोसा, संसद में मुद्दा उठाएंगे सांसद अनिल बलूनी

News Desk
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नई दिल्ली। उत्तराखंड के बेसिक शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से राहत दिलाने की मांग को लेकर गढ़वाल सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक अनिल बलूनी ने पहल का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की इस समस्या को आगामी संसद सत्र में उठाया जाएगा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के समक्ष भी मामला रखा जाएगा।

नई दिल्ली स्थित भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय में उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने सांसद अनिल बलूनी से मुलाकात कर शिक्षकों की समस्याओं से उन्हें अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के आदेश के बाद आरटीई अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त बेसिक शिक्षकों के सामने टीईटी को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

शिक्षक संघ के अनुसार, 1 अप्रैल 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी निर्धारित समय सीमा में टीईटी उत्तीर्ण करना होगा। 55 वर्ष से अधिक आयु के शिक्षकों को सेवा में बने रहने की छूट है, लेकिन टीईटी उत्तीर्ण नहीं करने पर पदोन्नति प्रभावित हो सकती है। वहीं, 1 सितंबर 2028 तक टीईटी उत्तीर्ण नहीं करने वाले शिक्षकों की सेवा पर भी संकट उत्पन्न होने की बात कही गई है।

प्रतिनिधिमंडल ने सांसद को बताया कि उत्तराखंड में करीब 18 हजार बेसिक शिक्षक इस व्यवस्था से प्रभावित हो सकते हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे शिक्षकों की है, जिन्होंने 25 से 30 वर्षों तक सरकार द्वारा निर्धारित तत्कालीन नियमों के अनुसार अपनी सेवाएं दी हैं।शिक्षकों का तर्क है कि जब उनकी नियुक्ति के समय टीईटी की अनिवार्यता लागू नहीं थी, तो सेवा के अंतिम पड़ाव पर दोबारा पात्रता परीक्षा अनिवार्य करना उनके लिए कठिन और अन्यायपूर्ण है।

सांसद अनिल बलूनी ने शिक्षकों की मांग को गंभीरता से लेते हुए भरोसा दिलाया कि वह इस विषय को उचित स्तर पर उठाएंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देशभर के प्रभावित शिक्षकों को राहत दिलाने के लिए केंद्र सरकार के समक्ष प्रभावी तरीके से मामला रखा जाएगा।

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