लोकसंस्कृति के संरक्षण और नारी सशक्तीकरण का संदेश लेकर सम्पन्न हुआ ‘लोकविरासत–नारी के संग 2026’लोकगीत

News Desk
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झोड़ा-चांचरी, कीर्तन, नाटक और ऐपण कला की प्रस्तुतियों ने मोहा मन; महिला प्रतिभागियों को मिला अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का मंचहल्द्वानी। Growing Wisdom Academy की ओर से आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘लोकविरासत–नारी के संग 2026’ का आयोजन रविवार, 27 अक्टूबर को उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी में उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, पारंपरिक कलाओं और लोकविधाओं का संरक्षण एवं संवर्धन करने के साथ महिलाओं की प्रतिभा को मंच प्रदान करना था।कार्यक्रम में कीर्तन मंडली प्रतियोगिता, लोकपर्व पर आधारित नाटक प्रतियोगिता, झोड़ा-चांचरी प्रतियोगिता, ऐपण प्रतियोगिता तथा मेहंदी प्रतियोगिता आयोजित की गईं।

प्रतिभागियों ने अपनी कला, रचनात्मकता और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के माध्यम से उत्तराखंड की समृद्ध लोकपरंपराओं की सुंदर झलक प्रस्तुत की।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नैनीताल जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टी.सी. की गरिमामई उपस्थिति रही । । कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. के. आर. भट्ट ने की। विशिष्ट अतिथि के के रूप में वरिष्ठ पत्रकार बलदेव भट्ट जी भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश सहसंयोजिका ममता पांगती, जीवंती देवभूमि संस्था की अध्यक्ष कविता बिष्ट ‘नेह’, कुमगढ़ पत्रिका के संपादक दामोदर जोशी देवांशु जी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम संयोजन मीना राणा तथा मंच संचालन में डिम्पल जोशी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन एवं गणेश वंदना के साथ किया गया। Growing Wisdom Academy की संस्थापक एवं निदेशक ललिता कापड़ी ने सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। अतिथियों एवं प्रतिभागियों का सम्मान करते हुए उन्होंने लोकसंस्कृति को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया।मुख्य अतिथि डॉ. मंजूनाथ टी.सी. ने अपने संबोधन में Growing Wisdom Academy के प्रयासों की सराहना की।

लोकसाहित्य और संस्कृति की विविध विधाओं—लोकछंद, लोकगायन, लोकनृत्य तथा पारंपरिक संगीत—के संरक्षण को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने ऐसे आयोजनों को सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने की दिशा में सराहनीय पहल बताया।विशिष्ट अतिथि श्रीमती ममता पांगती ने कुमाऊँनी भाषा और संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लोकपरंपराएँ हमारी पहचान हैं। उन्होंने नारी शक्ति की भूमिका को रेखांकित करते हुए महिलाओं को अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता के माध्यम से समाज के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।कार्यक्रम में साहित्यकार एवं शिक्षाविद् डॉ. गीता मिश्रा, डॉ. शशि जोशी, डॉ. भगवती पनेरू, लोकगायिका श्रीमती मीनू जोशी, साहित्यकार एवं शिक्षिका श्रीमती हेमा पंत तथा उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के संगीत विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने निर्णायक एवं अतिथि के रूप में सहभागिता की।

वरिष्ठ साहित्यकारों और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े व्यक्तित्वों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा बढ़ाई।समाज की समृद्ध, स्वाबलंबी, व सशक्त हस्ताक्षर आशा शैली व शांति जीना को “फ्रंट लाइन” अवार्ड से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उन्हें समाज हित में प्रेरणादाई कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका हेतु प्रदान किया गया।निर्णायकों ने प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों, कला-कौशल, मौलिकता और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के आधार पर उनका मूल्यांकन किया। प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। कीर्तन मंडलियों की भक्तिमय प्रस्तुतियों, लोकपर्व पर आधारित नाटकों, झोड़ा-चांचरी की पारंपरिक लय तथा ऐपण एवं मेहंदी की कलात्मक अभिव्यक्तियों ने कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया।इस अवसर पर विभिन्न कीर्तन मंडलियों, महिला समूहों, साहित्यकारों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं संस्कृति प्रेमियों ने सहभागिता की। आयोजन ने महिलाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, आपसी संवाद बढ़ाने और लोकविरासत से जुड़ने का अवसर प्रदान किया।

कार्यक्रम की सफलता में Growing Wisdom Academy की संस्थापक एवं निदेशक ललिता कापड़ी, कार्यक्रम संयोजक सुदर्शन मोना जोशी, मंच संचालक हिमानी जोशी, संपर्क साहित्य संस्था के सदस्यों, निर्णायक मंडल, स्वयंसेवकों तथा सभी प्रतिभागियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।‘लोकविरासत–नारी के संग 2026’ केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि लोकसंस्कृति के संरक्षण, महिला सशक्तीकरण और सांस्कृतिक मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने की दिशा में एक सार्थक पहल बनकर सामने आया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जब महिलाएँ अपनी परंपराओं, कला और सामूहिक शक्ति के साथ आगे बढ़ती हैं, तो संस्कृति की जड़ें और भी मजबूत होती हैं।

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