उत्तराखंड के सरकारी कॉलेजों में सुविधाओं की कमी, छात्र संख्या पर असर निजी विश्वविद्यालय कर रहे छात्रों को आकर्षित

News Desk
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उत्तराखंड में 26 वर्षों में 90 नए सरकारी कॉलेज खुलने के बावजूद छात्रों की संख्या में मामूली वृद्धि हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई कॉलेज बुनियादी सुविधाओं, जैसे प्रयोगशाला, पुस्तकालय और उचित शौचालयों के अभाव में दो कमरों में चल रहे हैं।

  1. 26 वर्षों में 90 नए कॉलेज, छात्र केवल 21 हजार बढ़े
  2. ग्रामीण कॉलेज दो कमरों में, बुनियादी सुविधाओं का अभाव
  3. निजी विश्वविद्यालय आकर्षित कर रहे, सरकारी कॉलेज पीछे

 देहरादून । नौ नवंबर, 2000 को राज्य गठन के समय प्रदेश में 34 राजकीय और 15 अशासकीय कालेजों में करीब 77 हजार विद्यार्थी उच्च शिक्षा ग्रहण करते थे। इसके बाद 26 वर्षों में 84 राजकीय व छह अशासकीय महाविद्यालय नये खोल दिए गए है जबकि इस अवधि में छात्रों की संख्या में मात्र 21,143 हजार ही बढ़ी। दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में खोले गए महाविद्यालय दो-दो कमरों में चल रहे हैं।

यहां प्रयोगशाला, पुस्तकालय, खेल मैदान यहां तक की छात्र-छात्राओं के लिए समुचित शौचालय सुविधा भी पर्याप्त नहीं है। जिससे छात्र ऐसे कालेजों से दूरी बनाते दिख रहे हैं।

आर्थिक सर्वेक्षण में उच्च शिक्षा में नए राजकीय और अशासकीय महाविद्यालयों की संख्या सहित छात्रों के वर्तमान आंकड़़ों को प्रस्तुत किया गया है, जिसमें यह तथ्य सामने आया है कि राज्य की सत्ता में काबिज हाेने वाली सरकारों ने अपने-अपने कार्यकाल में राजनीतिक लाभ के लिए छोटे छोटे कस्बों में सरकारी कालेज खोल लोकप्रियता बटोरने का काम तो किया, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने की कभी जरूरत महसूस नहीं की।

उच्च शिक्षा का सरकारी सच यह है

  • 118 राजकीय महाविद्यालयों में से केवल 46 नैक प्रत्यायन कर पाए हैं।
  • पांच महाविद्यालयों के पास भवन बनने को भूमि ही नहीं है।
  • 20 महाविद्यालय किराये के कमरों में संचालित हो रहे हैं।
  • 13 महाविद्यालय ऐसे हैं जहां छात्र संख्या 100 से कम है
  • 22 राजकीय महाविद्यालयों में छात्र संख्या 250 भी नहीं है।
  • 73 महाविद्यालयों में केवल पारंपरिक विषय का संचालन हो रहा।

निजी विश्वविद्यालय कर रहे छात्रों को आकर्षित

राज्य गठन के दौरान प्रदेश में मात्र पांच विवि थे जो आज बढ़कर 42 हो गए हैं। इसमें से अधिकतर निजी विवि आधुनिक साधन-सुविधायुक्त होने के कारण छात्रों को आकर्षित कर रहे हैं और ग्रामीण छात्र महंगी फीस अदा कर व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

निजी विश्वविद्यालय अत्याधुनिक बुनियादी ढांचा, आधुनिक पाठ्यक्रम, बेहतर प्लेसमेंट, और व्यक्तिगत मार्गदर्शन जैसे आकर्षणों के दम पर छात्रों को तेजी से अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। ये संस्थान उद्योग जगत से सीधे जुड़ाव, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और 100% तक छात्रवृत्ति के माध्यम से व्यावसायिक शिक्षा प्रदान कर रहे हैं, जो करियर के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

निजी विश्वविद्यालयों के छात्रों को आकर्षित करने के प्रमुख कारण:

  • अत्याधुनिक बुनियादी ढांचा: आधुनिक कक्षाएं, प्रयोगशालाएं, वाई-फाई परिसर और हॉस्टल।
  • बेहतर प्लेसमेंट: उद्योग जगत (Industry) के साथ मजबूत संबंध, इंटर्नशिप और व्यावहारिक ज्ञान।
  • आधुनिक और लचीला पाठ्यक्रम: समय के साथ बदलते उद्योग की जरूरतों के अनुसार अपडेटेड पाठ्यक्रम।
  • छात्रवृत्ति और वित्तीय सहायता: प्रतिभाशाली छात्रों के लिए 100% तक छात्रवृत्ति का विकल्प।
  • योग्य शिक्षक और छोटा क्लास साइज: व्यक्तिगत ध्यान (Personalized attention) देने के लिए छोटा छात्र-शिक्षक अनुपात।
  • वैश्विक एक्सपोजर: अंतरराष्ट्रीय यूनिवर्सिटी के साथ कोलैबोरेशन और स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम।

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